भूपेश बघेल के कथित आपत्तिजनक AI वीडियो पर बवाल, कांग्रेस नेताओं ने एफआईआर की मांग को लेकर थाना घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े कथित आपत्तिजनक AI वीडियो को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सिविल लाइन थाने में एफआईआर की मांग की। सोशल मीडिया पेज हटाने और दोषियों की गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel से जुड़े कथित आपत्तिजनक एआई (AI) वीडियो को लेकर कांग्रेस नेताओं ने कड़ा विरोध जताया है। इस मामले में कांग्रेस नेता सुशील सन्नी अग्रवाल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सिविल लाइन थाना पहुंचकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सोशल मीडिया पर "कांग्रेस पोल खोल" नामक एक इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से भ्रामक और अभद्र सामग्री प्रसारित की जा रही है। उनका कहना है कि इस सामग्री के जरिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की छवि को जानबूझकर धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इसको लेकर नेताओं ने इसे न केवल राजनीतिक साजिश बताया, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला भी करार दिया।
सुशील सन्नी अग्रवाल ने सिविल लाइन थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर दोषियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह की गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस कार्यकर्ता उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
थाना प्रभारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आश्वासन दिया कि साइबर सेल के माध्यम से इस प्रकरण की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि संबंधित वीडियो को 48 घंटे के भीतर हटाने और संबंधित सोशल मीडिया पेज को डिलीट कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। साथ ही आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दो दिनों के भीतर दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो वे बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ कमिश्नर कार्यालय का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की छवि का मामला नहीं है, बल्कि समाज में फैल रही फेक और भ्रामक सामग्री के खिलाफ भी एक बड़ा मुद्दा है।
इस दौरान कमलेश नथवाणी, नीलकंठ जगत, विक्की महानंद और राज तिवारी सहित कई अन्य कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस घटना की निंदा करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब देशभर में एआई तकनीक के दुरुपयोग को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के माध्यम से बनाए गए फर्जी वीडियो और सामग्री न केवल व्यक्तियों की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल पुलिस और साइबर सेल इस मामले की जांच में जुटी हुई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और दोषियों को कब तक गिरफ्तार किया जाता है।