बेमेतरा स्पेशल लोक अदालत में चेक बाउंस के 12 मामलों का निपटारा, 81.98 लाख रुपये के अवार्ड पारित

बेमेतरा जिला न्यायालय में आयोजित स्पेशल लोक अदालत में परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 से जुड़े 12 चेक बाउंस मामलों का आपसी समझौते से निराकरण किया गया। अदालत ने कुल 81.98 लाख रुपये के अवार्ड पारित किए। इस दौरान कई लंबित विवादों का त्वरित, सरल और कम खर्चीली प्रक्रिया के माध्यम से समाधान हुआ।

Jul 18, 2026 - 16:04
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बेमेतरा स्पेशल लोक अदालत में चेक बाउंस के 12 मामलों का निपटारा, 81.98 लाख रुपये के अवार्ड पारित

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l बेमेतरा जिला न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस विशेष लोक अदालत का उद्देश्य परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत लंबित चेक बाउंस मामलों का आपसी सहमति से त्वरित और प्रभावी निराकरण करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ राज्य स्तरीय वर्चुअल समारोह के माध्यम से हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। बेमेतरा जिला न्यायालय से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सरोज नंद दास सहित अन्य न्यायिक अधिकारी भी इस कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़े। इसके बाद जिला न्यायालय परिसर में दीप प्रज्ज्वलन कर स्पेशल लोक अदालत की औपचारिक शुरुआत की गई।

स्पेशल लोक अदालत के दौरान चेक अनादरण (चेक बाउंस) से जुड़े कुल 12 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। इन मामलों में आपसी समझौते के आधार पर कुल 81 लाख 98 हजार 960 रुपये के अवार्ड पारित किए गए। इस प्रक्रिया से पक्षकारों को लंबी न्यायिक कार्यवाही, अतिरिक्त खर्च और समय की बचत के साथ त्वरित न्याय मिला।

लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंक प्रतिनिधियों, न्यायालयीन कर्मचारियों, पैरालीगल वॉलेंटियर्स और पक्षकारों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी मामलों में सौहार्दपूर्ण वातावरण में संवाद और समझाइश के माध्यम से समझौते कराए गए।

कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण अपील प्रकरण भी चर्चा का विषय रहा। चेक बाउंस से संबंधित अपील क्रमांक 95/2024 में विचारण न्यायालय ने पहले 11.50 लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया था। स्पेशल लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से यह विवाद मात्र 2.50 लाख रुपये में सुलझ गया और उसी आधार पर अवार्ड पारित किया गया। इसी तरह दो अन्य अपील प्रकरणों का भी आपसी समझौते से सफलतापूर्वक निपटारा किया गया।

एक अन्य मामले में इलेक्ट्रॉनिक कांटा मशीन और कपड़ा दुकान के लिए उधार दी गई राशि को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। भुगतान के लिए दिया गया चेक बैंक से अनादरित होने के बाद मामला न्यायालय पहुंचा। स्पेशल लोक अदालत में दोनों पक्षों को समझाइश देकर बिना किसी दबाव के आपसी सहमति से समझौता कराया गया और विवाद का शांतिपूर्ण समाधान हुआ।

स्पेशल लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित किया कि आपसी संवाद और सहमति के माध्यम से लंबे समय से लंबित विवादों का सरल, कम खर्चीला और त्वरित समाधान संभव है। इस पहल से न केवल न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम होता है, बल्कि पक्षकारों को भी शीघ्र न्याय प्राप्त होता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।