पहली कार्रवाई वन परिक्षेत्र लुण्ड्रा अंतर्गत परिक्षेत्र सहायक वृत्त चेन्द्रा क्षेत्र में की गई। वन कर्मचारियों को सागौन की अवैध कटाई कर परिवहन किए जाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना के आधार पर रविवार को दरिमा चौक में नाकाबंदी कर वाहनों की सघन जांच की गई। इस दौरान चेन्द्रा की ओर से आ रहे एक पिकअप वाहन को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक द्वारा वाहन नहीं रोका गया।
तत्काल इसकी सूचना वन परिक्षेत्र लखनपुर की टीम को दी गई, जिसके बाद संयुक्त कार्रवाई करते हुए वाहन को ग्राम लोसगा के पास घेराबंदी कर पकड़ लिया गया। जांच के दौरान वाहन में लोड सागौन चिरान के परिवहन से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।
वन परिक्षेत्र लखनपुर, लुण्ड्रा एवं उड़दस्ता दल के कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए वाहन सहित 27 नग सागौन चिरान जप्त किया गया। जप्त सामग्री को सुरक्षित रूप से अम्बिकापुर स्थित काष्ठागार परिसर में रखा गया है। जप्त सागौन चिरान एवं वाहन की अनुमानित कीमत लगभग तीन लाख रुपये आंकी गई है। प्रकरण में भारतीय वन अधिनियम 1927 एवं छत्तीसगढ़ वनोपज व्यापार विनियमन अधिनियम 1969 के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज कर राजसात की कार्रवाई की जा रही है।
इस कार्रवाई में वनक्षेत्रपाल रामनिवास दहायत, उप वनक्षेत्रपाल रामेश्वर लकड़ा सहित वनपाल एवं वनरक्षक दल के कर्मचारी शामिल रहे।
दूसरी कार्रवाई रविवार को ही वन परिक्षेत्र उदयपुर क्षेत्र में की गई। रात्रि गश्ती के दौरान ग्राम घाटबर्रा के सुसकम रोड पर गिद्दमुड़ी की ओर से आ रहे एक अशोक लेलैंड वाहन क्रमांक CG 15 DY 6238 की जांच की गई। जांच के दौरान धान भूसी के बोरों के नीचे छिपाकर ले जाए जा रहे 16 नग साल चिरान (0.476 घन मीटर) पाए गए।
वाहन चालक द्वारा साल चिरान के परिवहन से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर वन कर्मचारियों द्वारा भारतीय वन अधिनियम 1927 तथा छत्तीसगढ़ वनोपज व्यापार विनियमन अधिनियम 1969 के अंतर्गत वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया है।
वन विभाग अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिले में अवैध लकड़ी कटाई एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। रात्रि गश्ती, नाका जांच और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से वनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग प्रतिबद्ध है। साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि वनों और पर्यावरण की रक्षा की जा सके।