नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दलसिंह राजपूत को 20 वर्ष का कठोर कारावास, फास्ट ट्रैक कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
फास्ट ट्रैक कोर्ट, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी दलसिंह राजपूत को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। मामले में पीड़िता की बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी में बचेली थाना क्षेत्र पुलिस की अहम भूमिका रही।
UNITED NEWS OF ASIA.कमलेश सिंह ठाकुर, दंतेवाडा | नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में न्याय की दिशा में बड़ा और अहम फैसला सामने आया है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा ने आरोपी दलसिंह राजपूत को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला दक्षिण बस्तर क्षेत्र में लंबे समय से चर्चा में रहा और अब अदालत के इस फैसले को पीड़ित पक्ष के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
प्रकरण के अनुसार आरोपी द्वारा नाबालिग पीड़िता को शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक शोषण किया गया था। मामले की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए पीड़िता की खोज और बरामदगी को प्राथमिकता दी।
यह पूरा मामला बचेली थाना क्षेत्र अंतर्गत दर्ज किया गया था। पुलिस द्वारा प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए लगातार तकनीकी और मैदानी स्तर पर कार्रवाई की गई। जांच के दौरान आरोपी की लोकेशन का पता लगाकर उसे बाहर राज्य से गिरफ्तार किया गया।
जानकारी के अनुसार आरोपी की गिरफ्तारी गुजरात से की गई थी। इसके बाद आरोपी को दंतेवाड़ा लाकर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया और नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत मामले की सुनवाई की गई।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य, गवाहों के बयान तथा पुलिस जांच में एकत्रित तथ्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाया। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि नाबालिग के विरुद्ध किए गए इस प्रकार के अपराध समाज के लिए अत्यंत घातक हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड दिया जाना आवश्यक है, ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए और भविष्य में इस प्रकार के अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके।
अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले में आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास एवं अन्य वैधानिक दंड से दंडित किया गया है। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि महिला एवं बाल सुरक्षा को लेकर न्याय व्यवस्था की संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।
इस पूरे प्रकरण में बचेली पुलिस की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। पीड़िता की सुरक्षित बरामदगी, आरोपी की पहचान, अंतरराज्यीय स्तर पर गिरफ्तारी और साक्ष्यों के संकलन में पुलिस की सक्रियता से ही मामला मजबूत रूप में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सका।
बताया गया है कि यह मामला दंतेवाड़ा जिले से जुड़ा हुआ है, जहां इस तरह के संवेदनशील मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से त्वरित सुनवाई की व्यवस्था की गई है।
फैसले के बाद क्षेत्र में यह संदेश गया है कि नाबालिगों के विरुद्ध अपराध करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं है। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने भी दोहराया है कि बच्चों और किशोरों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और प्रभावी जांच आगे भी जारी रहेगी।