गरियाबंद में घायल चौसिंगा का सफल रेस्क्यू, वन विभाग ने बचाई दुर्लभ वन्यजीव की जान

गरियाबंद के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में जंगली कुत्तों के हमले में घायल चौसिंगा का वन विभाग ने सफल रेस्क्यू किया। उपचार के बाद उसे सुरक्षित चीतल सॉफ्ट रिलीज एन्क्लोजर में रखा गया।

Jul 19, 2026 - 11:32
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गरियाबंद में घायल चौसिंगा का सफल रेस्क्यू, वन विभाग ने बचाई दुर्लभ वन्यजीव की जान

UNITED NEWS OF ASIA. गरियाबंद l गरियाबंद जिले के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) में वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कार्य करते हुए जंगली कुत्तों के हमले में घायल हुए एक दुर्लभ चौसिंगा (फोर हॉर्न्ड एंटीलोप) का सफल रेस्क्यू किया। इंदागांव बफर परिक्षेत्र के क्षेत्रपाल सुशील कुमार सागर के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने त्वरित कार्रवाई कर घायल वन्यजीव की जान बचाई।

जानकारी के अनुसार, धुरवागुड़ी के पास एक चौसिंगा पर जंगली कुत्तों ने हमला कर दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना गरियाबंद पुलिस के एक उपनिरीक्षक ने वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही क्षेत्रपाल सुशील कुमार सागर ने बिना देर किए अपनी टीम को सक्रिय किया और मौके पर पहुंचकर घायल चौसिंगा का सुरक्षित रेस्क्यू किया। इसके बाद वन विभाग के पशु चिकित्सकों ने उसका प्राथमिक उपचार किया।

वन विभाग ने दिनभर चौसिंगा की निगरानी और उपचार किया। उसकी स्थिति में सुधार होने के बाद शाम को उसे उत्तर उदंती परिक्षेत्र स्थित चीतल सॉफ्ट रिलीज एन्क्लोजर में सुरक्षित स्थानांतरित किया गया। इस एन्क्लोजर में पहले से दो अन्य चौसिंगा भी रखे गए हैं, जिन्हें पूर्व में जंगल में लगी आग के दौरान सुरक्षित बचाया गया था।

वन अधिकारियों के अनुसार, यह रेस्क्यू अभियान क्षेत्रपाल सुशील कुमार सागर और उनकी टीम की वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का एक और उदाहरण है। इससे पहले भी उनकी टीम ने कई महत्वपूर्ण वन्यजीव बचाव अभियान सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इसी वर्ष इंदागांव स्थित सीआरपीएफ कैंप की कंटीली फेंसिंग में फंसी एक भारतीय उड़न गिलहरी को सुरक्षित निकालकर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया था।

इसके अलावा, उनकी टीम ने एक गंभीर रूप से संकटग्रस्त व्हाइट-रम्प्ड वल्चर (सफेद पीठ वाला गिद्ध) का भी सफल रेस्क्यू किया था। यह गिद्ध महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से लगभग 400 किलोमीटर की उड़ान भरकर इंदागांव क्षेत्र पहुंचा था और अत्यधिक निर्जलित अवस्था में मिला था। जीपीएस ट्रांसमीटर से लैस इस गिद्ध को उपचार के लिए जंगल सफारी, नया रायपुर भेजा गया था। इस अभियान ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया था।

वन विभाग का कहना है कि इस प्रकार के सफल रेस्क्यू अभियान वन अमले, पशु चिकित्सकों और स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों का परिणाम हैं। पिछले कुछ वर्षों में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व ने त्वरित प्रतिक्रिया दल, आधुनिक तकनीक और सघन गश्त व्यवस्था के माध्यम से वन्यजीव बचाव और निगरानी व्यवस्था को काफी मजबूत किया है।

वन अधिकारियों ने कहा कि घायल चौसिंगा का सफल रेस्क्यू इस बात का प्रमाण है कि संकट की घड़ी में प्रत्येक वन्यजीव को समय पर सहायता और संरक्षण उपलब्ध कराने के लिए वन विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह अभियान जैव विविधता संरक्षण और दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति विभाग के निरंतर प्रयासों को भी दर्शाता है।