शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर जोर, गजेंद्र यादव ने गिनाईं दो वर्षों की उपलब्धियां
रायपुर में स्कूल शिक्षा विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता, भर्ती एवं पदोन्नति, विद्यार्थियों को सुविधाएं, विद्यालय अधोसंरचना, बहुभाषी शिक्षा और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सहित विभागीय कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया और 15,165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का समायोजन हुआ। 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती की गई, जबकि 5,000 शिक्षकीय पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, साइकिल और गणवेश उपलब्ध कराने के साथ शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल तकनीक और एआई आधारित मॉनिटरिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l स्कूल शिक्षा विभाग की विगत दो वर्षों की गतिविधियों और उपलब्धियों को लेकर अटल नगर, नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस को स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। इस दौरान शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षकों की उपलब्धता एवं पदोन्नति, भर्ती प्रक्रिया, विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं, विद्यालय अधोसंरचना, बहुभाषी शिक्षा और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों की जानकारी दी गई।
गजेंद्र यादव ने बताया कि पिछले दो वर्षों में स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के प्रावधानों के अनुरूप 10,538 विद्यालयों का समायोजन किया गया। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से 15,165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का समायोजन किया गया है। 453 शिक्षकविहीन विद्यालयों में शिक्षकों की पूर्ति की गई, जबकि 4,729 एकल शिक्षकीय विद्यालयों में अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था की गई।
शिक्षकों की पदोन्नति के क्षेत्र में भी विभाग ने उपलब्धियां बताईं। टी संवर्ग में 1,335 और ई संवर्ग में 1,478 सहित कुल 2,813 पदों पर प्राचार्यों की पदोन्नति की गई। इसके अलावा टी संवर्ग में 1,798 व्याख्याताओं की पदोन्नति हुई है। विभाग के अनुसार पिछले दो वर्षों में विभिन्न पदों पर 7,000 से अधिक पदोन्नतियां की गई हैं।
शिक्षक भर्ती को लेकर मंत्री ने बताया कि दिव्यांग बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेटर के 848 पद स्वीकृत किए गए हैं। वर्ष 2025 में 62 पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्ति हुई। पिछले दो वर्षों में 2,104 शैक्षणिक पदों पर सीधी भर्ती की गई है, जबकि 5,000 शिक्षकीय पदों पर सीधी भर्ती की परीक्षा प्रक्रिया जारी है। स्वामी आत्मानंद और स्वामी विवेकानंद विद्यालयों में 3,000 से अधिक पदों पर संविदा भर्ती की प्रक्रिया भी चल रही है।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय और अन्य शासकीय संस्थाओं में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक संविदा पदों के लिए राज्य स्तरीय ऑनलाइन कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी सीबीटी की शुरुआत की गई है। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के 1,895 और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय के 1,171 पदों सहित कुल 3,066 पदों पर संविदा भर्ती प्रक्रिया जारी है।
नई शिक्षा नीति के तहत 15 जुलाई 2024 से विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की गई। कक्षा 1 और 2 की हिंदी पुस्तकों में बारहखड़ी को शामिल किया गया है। कक्षा 1 और 2 के लिए 16 स्थानीय और 4 अंतरराज्यीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों का निर्माण किया गया है। कक्षा 1, 2, 3 और 6 की एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों का अनुकूलन किया गया है। कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए सहायक वाचन सामग्री भी विकसित की गई है।
बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ में भाषा-चित्रण की पहल की गई है। बस्तर संभाग में बच्चों की भाषा को कक्षा में उपयोग करने के लिए 2,700 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि सरगुजा संभाग में 2,368 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। कक्षा 1 से 3 तक छत्तीसगढ़ी, गोंडी, हल्बी और सादरी भाषाओं के अनुरूप पाठ्यपुस्तक निर्माण की प्रक्रिया जारी है।
शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक और टीके एप के माध्यम से उपस्थिति व्यवस्था लागू की गई है। विभाग के अनुसार प्रतिदिन करीब 85 प्रतिशत शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति टीके एप के माध्यम से दर्ज हो रही है। अवकाश प्रबंधन पोर्टल, पेपरलेस कार्यप्रणाली और ऑनलाइन संपत्ति विवरण जैसी व्यवस्थाओं से प्रशासनिक कामकाज को डिजिटल और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।
विद्यार्थियों को निःशुल्क सुविधाओं के तहत कक्षा 1 से 10 तक के विद्यार्थियों को सत्र शुरू होने से पहले पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने की पहल की गई, जिससे 45 लाख 33 हजार 261 विद्यार्थी लाभान्वित हुए। निःशुल्क सरस्वती साइकिल योजना के तहत 1 लाख 62 हजार 827 बालिकाओं को लाभ मिला। वहीं कक्षा 1 से 8 तक के 28 लाख 63 हजार 786 विद्यार्थियों को निःशुल्क गणवेश उपलब्ध कराया गया।
मंत्री ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों में करीब 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। परीक्षा पूर्व समीक्षा, ब्लूप्रिंट निर्माण, अध्यापन, पालक-शिक्षक बैठक और केंद्रीकृत परीक्षाओं के माध्यम से परिणामों में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।
विद्यालय अधोसंरचना को लेकर विभाग ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 504 नए विद्यालयों की स्वीकृति दी गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 700 भवनविहीन विद्यालयों के लिए नए विद्यालय भवन का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2023 से 2026 के बीच 2,583 अतिरिक्त कक्षों की स्वीकृति दी गई। विद्यालयों के शौचालय निर्माण और मरम्मत के लिए 52 करोड़ 39 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों के भवन निर्माण और संचालन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। विभाग का लक्ष्य प्रत्येक विकासखंड में कम से कम एक स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित करना है।
बस्तर और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। बस्तर संभाग के छह जिलों के 97 प्रतिशत ग्रामों में प्राथमिक शालाओं की स्थापना की गई है। द्विभाषीय पुस्तकों के माध्यम से 13,817 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया। शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय विद्यालयों में 573 शिक्षा दूतों के माध्यम से शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। 48 बंद विद्यालयों को फिर से शुरू किया गया है और 36 नए विद्यालय प्रारंभ किए गए हैं।
शिक्षा व्यवस्था की ऑनलाइन मॉनिटरिंग के लिए एआई आधारित विद्या समीक्षा केंद्र की स्थापना की गई है। इसके माध्यम से अधोसंरचना, भौतिक सुविधाओं, पीएम पोषण और विभिन्न योजनाओं की निगरानी की जा रही है। कॉल सेंटर के माध्यम से शिक्षकों, पालकों, संकुल समन्वयकों और अधिकारियों से एक लाख से अधिक कॉल के जरिए फीडबैक लिया गया है। पाठ्यपुस्तक वितरण की बारकोड आधारित ट्रैकिंग से शासन को करीब 40 करोड़ रुपये की बचत होने की जानकारी भी दी गई।
प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों के लिए विद्यालयों के समीप आवासीय सुविधा विकसित की जा रही है। प्रदेश में संचालित 156 आवासीय विद्यालय एवं छात्रावासों में 33 हजार से अधिक बच्चे आवासीय सुविधा का लाभ ले रहे हैं। 13 जिलों में 40 पीवीटीजी छात्रावास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 21 का निर्माण शुरू हो चुका है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग की ओर से कहा गया कि प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण और समान अवसर वाली शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षकों की उपलब्धता, पारदर्शी भर्ती और पदोन्नति, आधुनिक अधोसंरचना, बहुभाषी शिक्षा, डिजिटल तकनीक, शैक्षणिक सामग्री और जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक शिक्षा की पहुंच को प्राथमिकता दी जा रही है। विभाग का व्यापक लक्ष्य छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है।