उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण में छत्तीसगढ़ बना राष्ट्रीय मॉडल, किसानों के हित में रिकॉर्ड कार्रवाई
छत्तीसगढ़ कृषि विभाग ने खरीफ सीजन में उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अमानक उर्वरकों पर नियंत्रण के लिए रिकॉर्ड प्रवर्तन कार्रवाई की है। वर्ष 2025 की तुलना में कार्रवाई में 10.25 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। विभाग का कहना है कि इस अभियान से किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में सफलता मिली है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और नकली एवं अमानक उर्वरकों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कृषि विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। विभाग का दावा है कि खरीफ सीजन के दौरान उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत की गई प्रवर्तन कार्रवाई के मामले में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन और कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में इस अभियान को गति मिली है।
कृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2025 की तुलना में वर्ष 2026 के खरीफ सीजन में प्रवर्तन कार्रवाई में 10.25 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष जहां 44 मामलों में कार्रवाई की गई थी, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 451 तक पहुंच गई है। विभाग का कहना है कि यह वृद्धि उर्वरकों की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी और किसानों के हितों की रक्षा के लिए अपनाई गई प्रभावी रणनीति का परिणाम है।
विभाग द्वारा राज्यभर में उर्वरकों के भंडारण, विक्रय और वितरण केंद्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। विभाग का कहना है कि इस अभियान से नकली और अमानक उर्वरकों की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगा है तथा कृषि आदानों की पारदर्शी आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में न्यायालय में प्रस्तुत प्रकरणों की संख्या 4 से बढ़कर 56 हो गई है। इसी तरह जब्ती की कार्रवाई 2 से बढ़कर 98, लाइसेंस निलंबन के मामले 3 से बढ़कर 97, लाइसेंस निरस्तीकरण 2 से बढ़कर 10 तथा विक्रय प्रतिबंध की कार्रवाई 33 से बढ़कर 183 तक पहुंच गई है। विभाग ने पहली बार 7 मामलों में एफआईआर भी दर्ज कराई है, जिसे सख्त निगरानी और शून्य सहिष्णुता की नीति का परिणाम बताया गया है।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में विभाग ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया है कि किसानों तक केवल प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण उर्वरक ही पहुंचे। इसके लिए नियमित निरीक्षण, उर्वरक नमूनों की जांच, शिकायतों का त्वरित निराकरण तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है। विभाग का दावा है कि इससे किसानों का भरोसा कृषि व्यवस्था पर और अधिक मजबूत हुआ है।
कृषि विभाग का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और कृषि को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाना भी है। गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता, सतत निगरानी और जवाबदेही आधारित व्यवस्था के माध्यम से राज्य में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। विभाग का विश्वास है कि इन पहलों से किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ-साथ दीर्घकालिक लाभ भी मिलेगा।