बस्तर की जैविक खेती को मिलेगा वैश्विक बाजार, यूरोप तक पहुंचेंगे उत्पाद: विजय शर्मा

छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में नई पहल शुरू की है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने रासायनिक उर्वरकों से मुक्त गांवों की पहचान कर जैविक प्रमाणन कराने और यूरोप सहित वैश्विक बाजारों तक उत्पादों की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

Jul 11, 2026 - 15:07
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बस्तर की जैविक खेती को मिलेगा वैश्विक बाजार, यूरोप तक पहुंचेंगे उत्पाद: विजय शर्मा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर संभाग की प्राकृतिक और जैविक खेती को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार अब बस्तर के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय बाजारों के साथ-साथ यूरोप सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। इस पहल का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करना, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और बस्तर की विशिष्ट कृषि पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है।

नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बस्तर के उन गांवों की पहचान की जाए, जहां किसानों ने आज तक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है। ऐसे गांवों का जैविक प्रमाणन कर उन्हें राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) से जोड़ा जाएगा, ताकि वहां उत्पादित कृषि सामग्री को प्रमाणित जैविक उत्पाद के रूप में बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा सके।

बैठक में विजय शर्मा ने बताया कि हाल ही में नारायणपुर और कांकेर के नक्सल मुक्त गांवों के दौरे के दौरान किसानों ने जानकारी दी थी कि वे वर्षों से बिना रासायनिक उर्वरकों के खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे गांव छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर हैं और उनकी जैविक पहचान को सुरक्षित रखते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई जाएगी।

सरकार का मानना है कि जैविक प्रमाणन मिलने के बाद किसानों को अपने उत्पादों का वर्तमान मूल्य की तुलना में तीन से चार गुना अधिक मूल्य मिल सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और प्राकृतिक खेती को भी नई गति मिलेगी। साथ ही बस्तर के उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होंगे।

बैठक में जैविक उत्पादों के निर्यात के लिए एनपीओपी और सहभागी गारंटी प्रणाली (पीजीएस) के अंतर्गत आवश्यक प्रमाणन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। ग्राम स्तर पर सहकारी समितियों के गठन, गुणवत्ता परीक्षण, विपणन और निर्यात की रणनीति तैयार करने पर भी सहमति बनी। सरकार की योजना है कि प्रमाणित उत्पादों का निर्यात बिहान के "छत्तीसकला" ब्रांड के माध्यम से किया जाए।

इसके लिए एपीडा, कृषि विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों के संयुक्त दल नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों का दौरा करेंगे। ये दल जैविक क्षेत्रों का सर्वेक्षण, उत्पादों की गुणवत्ता जांच और आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया पूरी करेंगे।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अधिकारियों को केंद्र सरकार को पत्र भेजकर बस्तर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए एनपीओपी प्रमाणन के लिए निर्धारित तीन वर्ष की अनिवार्य अवधि में छूट देने का प्रस्ताव भी तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही वनोपज को निर्यात के लिए तैयार करने और प्रमाणन संस्थाओं के सहयोग से पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया गया। सरकार का लक्ष्य बस्तर की जैविक खेती को वैश्विक बाजार से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाना और क्षेत्र को प्राकृतिक कृषि का राष्ट्रीय मॉडल बनाना है।