आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अब साड़ी खरीदने की राशि सीधे खाते में मिलेगी, केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था समाप्त
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए साड़ी की केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब यूनिफॉर्म साड़ी खरीदने के लिए निर्धारित राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यकर्ताओं को अपनी पसंद के अनुसार साड़ी खरीदने की सुविधा मिलेगी।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के हित में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार करते हुए साड़ी की केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय लिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि अब यूनिफॉर्म साड़ी खरीदने के लिए निर्धारित राशि सीधे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से भेजी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सरल और हितग्राही केंद्रित बनेगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, हाल के दिनों में साड़ी खरीदी प्रक्रिया को लेकर प्राप्त सुझावों और विभिन्न स्तरों पर उठे मुद्दों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है। नई व्यवस्था लागू होने से कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को अपनी पसंद तथा स्थानीय आवश्यकता के अनुसार साड़ी खरीदने की सुविधा मिलेगी, जबकि विभाग निर्धारित रंग और डिज़ाइन के माध्यम से पूरे प्रदेश में एकरूपता बनाए रखेगा।
लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुरूप शासन की अधिकतम राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि बिचौलियों और अनावश्यक प्रक्रियाओं की भूमिका समाप्त हो सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है और विभाग का यह निर्णय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि साड़ी का डिज़ाइन पूर्ववत रखा जाए तथा अंतिम स्वरूप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से परामर्श के बाद तय किया जाए। साड़ी का रंग और डिज़ाइन विभाग द्वारा निर्धारित कर उसकी जानकारी विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि कपड़े का चयन—जैसे कॉटन, सिंथेटिक अथवा अन्य विकल्प—स्थानीय स्तर पर स्वयं कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी सुविधा के अनुसार कर सकेंगी।
उन्होंने कहा कि विभाग में वर्षों से चली आ रही व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है और जहां भी सुधार की आवश्यकता महसूस होगी, वहां हितग्राहियों के हित में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के सम्मान, सुविधा और अधिकारों की रक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के तहत प्रत्येक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का प्रावधान है, जिसके लिए प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये निर्धारित हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से न केवल खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि हितग्राहियों को अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार भी मिलेगा। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण आधारित यह व्यवस्था प्रदेश में सुशासन और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।