नववर्ष में अम्बेडकर अस्पताल का नव कीर्तिमान: “चिमनी” तकनीक से जटिल TAVI प्रक्रिया में बचाई मरीज की जान

रायपुर स्थित पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय ने नववर्ष 2026 की शुरुआत एक ऐतिहासिक कार्डियक उपलब्धि के साथ की। अत्यंत जटिल TAVI प्रक्रिया के दौरान बंद हुई हृदय की नसों को “चिमनी” तकनीक से स्टेंट लगाकर खोलते हुए बुजुर्ग महिला की जान बचाई गई।

Jan 9, 2026 - 11:56
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नववर्ष में अम्बेडकर अस्पताल का नव कीर्तिमान: “चिमनी” तकनीक से जटिल TAVI प्रक्रिया में बचाई मरीज की जान

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर |  पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के एडवांस्ड कार्डियक इंस्टिट्यूट (ACI) ने नववर्ष 2026 की शुरुआत एक ऐतिहासिक और चुनौतीपूर्ण कार्डियक सफलता के साथ की है। अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग ने अत्यंत जटिल ट्रांसकैथेटर ऑर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण (TAVI) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देकर एक बुजुर्ग महिला की जान बचाई।

महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. विवेक चौधरी ने बताया कि वर्ष 2025 में कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा 2600 से अधिक जटिल हृदय प्रक्रियाएँ की गईं। वर्ष 2009 में मात्र 41 मामलों से शुरू हुआ यह विभाग आज प्रतिवर्ष 2000 से अधिक उन्नत कार्डियक प्रक्रियाएँ कर रहा है, जिससे शासकीय चिकित्सा संस्थानों पर आम जनता का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि रायपुर निवासी बुजुर्ग महिला लंबे समय से सांस फूलने और हार्ट फेलियर से पीड़ित थीं। जांच में पता चला कि उनका ऑर्टिक वाल्व पूरी तरह कैल्शियम से कठोर हो चुका था और हृदय की पंपिंग क्षमता मात्र 20 प्रतिशत रह गई थी। इस स्थिति में ओपन हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण और लगभग असंभव थी।

ऐसे में डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में कार्डियोलॉजी टीम और कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू की संयुक्त ‘हार्ट टीम’ ने बिना चीर-फाड़ के पैर की नस के माध्यम से TAVI प्रक्रिया करने का निर्णय लिया। एक माह पूर्व विशेष सीटी स्कैन विश्लेषण, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से वित्तीय स्वीकृति और विस्तृत रणनीति के साथ प्रक्रिया की तैयारी की गई।

जांच में सामने आया कि मरीज की पैर की नसें अत्यंत पतली और कैल्शियम युक्त थीं, जिससे वाल्व डिलीवरी चुनौतीपूर्ण थी। साथ ही जन्मजात संरचना के कारण हृदय की कोरोनरी धमनियाँ वाल्व के बेहद करीब थीं, जिससे प्रत्यारोपण के दौरान दोनों नसों के बंद होने का गंभीर खतरा था।

इस चुनौती से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने अल्ट्राथिन डिलीवरी सिस्टम का उपयोग करते हुए दोनों कोरोनरी धमनियों में स्टेंट लगाकर उनके और वाल्व के बीच “चिमनी” संरचना तैयार की। प्रक्रिया के अंतिम चरण में बाएं पैर की नस में ब्लॉकेज उत्पन्न हुआ, जिसे दाहिने पैर के रास्ते तत्काल बलून एंजियोप्लास्टी कर ठीक किया गया।

लगभग चार घंटे चली इस जटिल प्रक्रिया के बाद ऑपरेशन टेबल पर ही मरीज के ऑर्टिक वाल्व का प्रेशर 80 से घटकर शून्य हो गया और हृदय की पंपिंग क्षमता 20 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुँच गई। मरीज को हार्ट कमांड सेंटर में अति गहन निगरानी में रखा गया और बाद में स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किया गया।

अस्पताल अधीक्षक प्रो. डॉ. संतोष सोनकर ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि अम्बेडकर अस्पताल अब देश के अग्रणी सरकारी कार्डियक संस्थानों में शामिल हो चुका है।

इस प्रक्रिया को डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में डॉ. शिवकुमार शर्मा, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. सौम्या, डॉ. वैभव, डॉ. प्रिंस सहित पूरी कार्डियक, एनेस्थेसिया, नर्सिंग और कैथलैब टीम ने सफल बनाया।

यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के शासकीय स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता, तकनीकी दक्षता और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।