आदित्य नारायण बोले – “लाइफ में आगे बढ़ना है तो मोबाइल से रखिए दूरी, मेहनत ही असली सफलता की कुंजी”
रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के मंच से गायक आदित्य नारायण ने युवाओं को संदेश दिया कि सफलता पाने के लिए मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर कड़ी मेहनत जरूरी है। उन्होंने बताया कि उनके पिता उदित नारायण ने 32 साल की मेहनत के बाद सफलता पाई। आदित्य ने सुपर-इंटेलिजेंट एआई को मानवता के लिए खतरा बताया और 2026 में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता पर आधारित म्यूजिक एल्बम बनाने की घोषणा की।
UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के मंच पर पहुंचे बॉलीवुड गायक, अभिनेता और लोकप्रिय होस्ट आदित्य नारायण ने युवाओं को प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि “यदि जीवन में आगे बढ़ना है, तो मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर कड़ी मेहनत करनी होगी।” उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी मोबाइल और टैबलेट पर समय बर्बाद कर रही है, जिससे उनकी प्रतिभा दबती जा रही है।
आदित्य ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेरे पिता उदित नारायण ने गायकी में 32 वर्षों की तपस्या के बाद 1981 में सफलता पाई। मैंने भी बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की, लेकिन हर मोड़ पर चुनौतियों का सामना किया। मेहनत, समर्पण और धैर्य ही वह रास्ता है जो व्यक्ति को उसकी मंजिल तक पहुंचाता है।
उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया एक माध्यम है, लेकिन वास्तविक पहचान तभी बनती है जब दर्शक मंच पर आपकी प्रस्तुति पर तालियां बजाएं। “सोशल मीडिया पर 1 करोड़ फॉलोअर बनाना आसान है, पर मंच पर खड़े होने के लिए वर्षों की साधना जरूरी है,” उन्होंने कहा।
आदित्य नारायण ने भविष्य को लेकर चिंता जताई और कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मानवता के लिए खतरा बन सकती है। “मनुष्य ने मशीनों को अपनी सहायता के लिए बनाया, लेकिन अब वही मशीनें इंसान से आगे निकलने की दौड़ में हैं। यदि सुपर-इंटेलिजेंट एआई मानव मूल्यों से भटक गई, तो यह मानव अस्तित्व के लिए गंभीर संकट साबित हो सकती है,” उन्होंने चेतावनी दी।
रायपुर प्रवास के दौरान आदित्य नारायण छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता से प्रभावित हुए। उन्होंने बताया कि माता कौशल्या धाम, बस्तर की कलाकृतियां, जंगल सफारी और यहां के लोकसंगीत ने उन्हें गहराई से छुआ है। आदित्य ने घोषणा की कि वे वर्ष 2026 में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और प्राकृतिक छटाओं पर आधारित एक विशेष म्यूजिक एल्बम बनाएंगे, जिससे राज्य को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।
राज्योत्सव के मंच से आदित्य नारायण का यह संदेश न केवल युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना, बल्कि तकनीक और मानवीय मूल्यों के संतुलन पर भी गहन विचार छोड़ गया।