भाजपा बताए किस बात का आपातकाल मना रही है? जनता वर्तमान के सवालों का जवाब मांग रही है : वसीम खान

रायगढ़ में जिला कांग्रेस महामंत्री वसीम खान ने भाजपा के आपातकाल दिवस कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की जनता इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान की समस्याओं का समाधान चाहती है। उन्होंने रोजगार, महंगाई, किसानों, आदिवासियों, शिक्षा, स्वास्थ्य और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े कई मुद्दों पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा।

Jun 27, 2026 - 10:44
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भाजपा बताए किस बात का आपातकाल मना रही है? जनता वर्तमान के सवालों का जवाब मांग रही है : वसीम खान

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l रायगढ़ में जिला कांग्रेस महामंत्री वसीम खान ने भाजपा द्वारा आपातकाल दिवस मनाए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी को इतिहास की घटनाओं पर राजनीति करने के बजाय वर्तमान की चुनौतियों का जवाब देश की जनता को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश जिन परिस्थितियों से गुजर रहा है, वह आम नागरिकों के लिए किसी अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति का एहसास कराती हैं।

वसीम खान ने कहा कि आज देश का युवा, किसान, मजदूर, व्यापारी, कर्मचारी, महिलाएं, आदिवासी, गरीब और मध्यम वर्ग अनेक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की मौजूदा समस्याओं का समाधान करने के बजाय अतीत की घटनाओं को राजनीतिक मुद्दा बना रही है।

उन्होंने कहा कि देश का युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है, लेकिन बार-बार होने वाले पेपर लीक, भर्ती घोटालों और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है, सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं और नियमित भर्तियां नहीं हो रही हैं। संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के कारण स्थायी रोजगार के अवसर भी कम होते जा रहे हैं।

महंगाई के मुद्दे पर वसीम खान ने कहा कि रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल, दाल, दूध, सब्जियां और दवाइयों की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग अपनी आय का बड़ा हिस्सा केवल दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में खर्च करने के लिए मजबूर है।

उन्होंने किसानों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। बढ़ती खेती लागत, महंगे खाद-बीज, डीजल, बिजली और सिंचाई खर्च के कारण किसान आर्थिक दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि कई किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य भी नहीं मिल रहा है।

वसीम खान ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी का सबसे अधिक असर छोटे व्यापारियों, लघु उद्योगों और असंगठित क्षेत्र पर पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक उपक्रमों, रेलवे, हवाई अड्डों और अन्य राष्ट्रीय संपत्तियों के निजीकरण को लेकर भी सरकार को अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए।

उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए कहा कि विकास के नाम पर जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से आदिवासी समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जंगल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, पहचान और आजीविका का आधार हैं।

उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि निजी शिक्षा एवं चिकित्सा का खर्च लगातार बढ़ने से आम नागरिकों की पहुंच गुणवत्तापूर्ण सेवाओं तक कठिन होती जा रही है। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, आर्थिक असमानता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा।

वसीम खान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता, पर्यावरण संरक्षण तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करती रही है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है और आज जनता इतिहास नहीं, बल्कि रोजगार, महंगाई, किसानों की आय, युवाओं के भविष्य और जनहित से जुड़े वर्तमान सवालों का जवाब मांग रही है।