उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कैमरा ट्रैप में कैद हुआ चार ढोलों का झुंड, संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता

अखिल भारतीय बाघ आकलन 2026 के दौरान उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का झुंड रिकॉर्ड हुआ है। वन विभाग ने इसे रिजर्व की बेहतर होती पारिस्थितिकी और सफल संरक्षण प्रयासों का महत्वपूर्ण संकेत बताया है।

Jul 2, 2026 - 10:53
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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कैमरा ट्रैप में कैद हुआ चार ढोलों का झुंड, संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 के अंतर्गत उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार भारतीय जंगली कुत्तों, जिन्हें ढोल के नाम से जाना जाता है, के एक संगठित झुंड की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए गए हैं। वन विभाग ने इसे रिजर्व की बेहतर होती पारिस्थितिकी, वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और बीते वर्षों में किए गए प्रभावी संरक्षण प्रयासों का महत्वपूर्ण प्रमाण माना है।

कैमरा ट्रैप में एक साथ चार ढोलों का दर्ज होना इस बात का संकेत है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का वन क्षेत्र अब दुर्लभ और संवेदनशील वन्यजीवों के लिए अधिक अनुकूल होता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी क्षेत्र में ढोल जैसे शीर्ष समूह-शिकारी की मौजूदगी वहां के पारिस्थितिकीय संतुलन और स्वस्थ वन तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है।

ढोल (Cuon alpinus) भारत के सबसे दुर्लभ और आकर्षक मांसाहारी वन्यजीवों में शामिल हैं। यह प्रजाति अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में "संकटग्रस्त (Endangered)" श्रेणी में सूचीबद्ध है। साथ ही वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के अंतर्गत इसे सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इनकी घटती संख्या के कारण इनका संरक्षण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता का विषय बना हुआ है।

ढोल अत्यंत सामाजिक स्वभाव के जीव होते हैं। ये हमेशा संगठित झुंड में रहते हैं और सामूहिक रणनीति के साथ शिकार करते हैं। चीतल, सांभर और जंगली सूअर जैसे शाकाहारी वन्यजीव इनके प्रमुख शिकार होते हैं। इनकी उपस्थिति जंगल में शाकाहारी जीवों की संख्या को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे वनस्पतियों का संरक्षण और प्राकृतिक पुनर्जनन भी बेहतर होता है। यही कारण है कि इन्हें वन पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण घटक माना जाता है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार ढोल दुनिया के सबसे प्रभावी समूह-शिकारियों में गिने जाते हैं। उनकी सामूहिक रणनीति, अनुशासन और समन्वय उन्हें अत्यंत सक्षम शिकारी बनाता है। बड़े और संगठित झुंड की स्थिति में वे कई बार बाघ जैसे बड़े परभक्षियों को भी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं, हालांकि ऐसी घटनाएं बेहद दुर्लभ होती हैं।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कैमरा ट्रैप के माध्यम से इस झुंड का रिकॉर्ड होना वन विभाग द्वारा किए जा रहे संरक्षण, गश्त, आवास सुधार और जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के दस्तावेजी साक्ष्य भविष्य की संरक्षण योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होंगे। साथ ही यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।