वनांचल के हजारों परिवारों की उम्मीद बने तीन डॉक्टर, निःस्वार्थ सेवा से बदली नगरी-सिहावा की स्वास्थ्य व्यवस्था

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर नगरी-सिहावा वनांचल में वर्षों से सेवा दे रहे डॉ. अरुण नेताम, डॉ. एस.के. नाग और डॉ. किशोर साहू की समर्पित सेवाएं चर्चा में हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद तीनों डॉक्टरों ने हजारों मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया और शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत किया।

Jun 30, 2026 - 18:43
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वनांचल के हजारों परिवारों की उम्मीद बने तीन डॉक्टर, निःस्वार्थ सेवा से बदली नगरी-सिहावा की स्वास्थ्य व्यवस्था

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर धमतरी जिले के नगरी-सिहावा वनांचल से सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं की तीन प्रेरणादायक कहानियां सामने आई हैं। बीहड़ जंगलों, सीमित संसाधनों, दुर्गम रास्तों और वर्षों तक नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्र में डॉ. अरुण नेताम, डॉ. एस.के. नाग और डॉ. किशोर साहू ने अपने कार्यों से यह साबित किया है कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है।

सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व से लगे नगरी-सिहावा क्षेत्र के 60 से अधिक गांव आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं। बरसात के मौसम में कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट जाता है। ऐसी परिस्थितियों में इन तीनों डॉक्टरों ने वर्षों तक लगातार अपनी सेवाएं देकर हजारों परिवारों को राहत पहुंचाई है।

सिविल अस्पताल नगरी में पदस्थ डॉ. अरुण नेताम पिछले 25 वर्षों से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत कड़ी बने हुए हैं। उनके नेतृत्व में 20 हजार से अधिक सुरक्षित प्रसव कराए जा चुके हैं। अस्पताल में वे एकमात्र स्त्री रोग विशेषज्ञ होने के बावजूद सामान्य प्रसव, हाई-रिस्क सीजेरियन, दुर्घटना, सर्पदंश और अन्य आपातकालीन मामलों में भी लगातार सेवाएं देते रहे हैं। अस्पताल कर्मियों के अनुसार किसी भी समय आपात स्थिति होने पर वे तुरंत अस्पताल पहुंचकर मरीजों का उपचार करते हैं। यही कारण है कि दूर-दराज के ग्रामीणों में उनके प्रति गहरा विश्वास है।

पीएचसी बेलर से जुड़े डॉ. एस.के. नाग की सेवा यात्रा भी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने उस दौर में बेलर में कार्यभार संभाला, जब वहां सड़क जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियों से प्रभावित क्षेत्र में उन्होंने गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाया, दवाइयों का वितरण कराया और स्वच्छता पर विशेष कार्य किया। वर्ष 2020 में शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने क्षेत्र नहीं छोड़ा और आज भी आसपास के अनेक गांवों के लोगों को चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति सम्मान और राज्य सरकार के लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।

पीएचसी साँकरा में पदस्थ डॉ. किशोर साहू ने पिछले आठ वर्षों में अस्पताल की तस्वीर बदल दी। सीमित संसाधनों वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उन्होंने आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर मॉडल स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया। उनके नेतृत्व में अस्पताल को वर्ष 2023 में 'कायाकल्प अवार्ड' तथा वर्ष 2025 में 'एनक्यूएएस (NQAS) सर्टिफिकेशन' प्राप्त हुआ। अस्पताल में स्वच्छता, पेयजल, प्रतीक्षालय और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के कारण दूर-दराज के मरीज भी उपचार के लिए यहां पहुंच रहे हैं।

इन तीनों डॉक्टरों की निःस्वार्थ सेवा ने यह सिद्ध कर दिया है कि समर्पण, संवेदनशीलता और सेवा भावना से कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी संचालन संभव है। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर इनकी कार्यशैली न केवल चिकित्सा जगत के लिए प्रेरणा है, बल्कि समाज के प्रति कर्तव्यनिष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।