तीन दिनों से बिजली बंद, सिंचाई ठप होने से सूखने लगी किसानों की लौकी की फसल
महासमुंद जिले के बागबाहरा क्षेत्र में बाजार पारा फीडर से पतेरापाली तक पिछले तीन दिनों से बिजली आपूर्ति बंद होने के कारण किसानों की लौकी सहित अन्य सब्जियों की फसलें सूखने लगी हैं। सिंचाई पूरी तरह प्रभावित होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है। किसानों ने बिजली विभाग और प्रशासन से तत्काल बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुन्द l महासमुंद जिले के बागबाहरा क्षेत्र के किसानों के सामने इन दिनों बिजली संकट एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। बाजार पारा फीडर से पतेरापाली तक पहुंचने वाली विद्युत लाइन पिछले तीन दिनों से बंद पड़ी है, जिसके कारण क्षेत्र के किसानों की खेती बुरी तरह प्रभावित हो रही है। लगातार बिजली आपूर्ति बाधित रहने से खेतों में सिंचाई पूरी तरह ठप हो गई है और किसानों की मेहनत से तैयार की गई लौकी सहित अन्य सब्जियों की फसलें धीरे-धीरे सूखने लगी हैं। समय पर सिंचाई नहीं होने के कारण किसानों के सामने भारी आर्थिक नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो कई किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।
बागबाहरा क्षेत्र के किसान मुख्य रूप से लौकी, भिंडी, मिर्च, बैंगन, करेला, टमाटर सहित कई प्रकार की सब्जियों की खेती करते हैं। इन फसलों को नियमित अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। लेकिन पिछले तीन दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद होने के कारण खेतों में लगे विद्युत मोटर और पंप संचालित नहीं हो पा रहे हैं। इससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है और तेज धूप तथा बढ़ते तापमान के बीच फसलें मुरझाने लगी हैं। किसानों का कहना है कि सब्जी की खेती में लागत अधिक होती है और यदि समय पर पानी नहीं मिले तो कुछ ही दिनों में पूरी फसल नष्ट हो सकती है।
प्रभावित किसानों ने बताया कि उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार मौखिक रूप से सूचना दी। कई ग्रामीणों ने फोन के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक न तो लाइन की मरम्मत की गई और न ही बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी। किसानों का आरोप है कि विभाग उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। यदि समय रहते विभाग ने कार्रवाई की होती तो फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता था।
ग्रामीणों के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब उन्हें इस प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि क्षेत्र में हल्की बारिश, तेज हवा या सामान्य तकनीकी खराबी के बाद भी कई दिनों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। कई बार तीन से चार दिनों तक बिजली नहीं आती, जिससे खेती-किसानी के साथ-साथ ग्रामीणों का दैनिक जीवन भी प्रभावित होता है। लोगों का कहना है कि बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
किसानों का कहना है कि वर्तमान समय खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। खेतों में लगी सब्जियों की फसल तैयार होने की स्थिति में है और यदि इसी समय सिंचाई रुक जाती है तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। कई किसानों ने बीज, खाद, दवा, मजदूरी और सिंचाई व्यवस्था पर बड़ी राशि खर्च की है। यदि फसल सूख जाती है तो उनकी पूरी मेहनत और निवेश पर पानी फिर जाएगा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर होगी और आने वाले समय में खेती करना भी मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों ने बताया कि बिजली आपूर्ति बंद होने से केवल खेती ही प्रभावित नहीं हुई है बल्कि पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। कई स्थानों पर घरेलू उपयोग के लिए भी पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है क्योंकि अधिकांश लोग बिजली से चलने वाले पंपों पर निर्भर हैं। बिजली नहीं रहने से छोटे व्यापारियों और ग्रामीणों के दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
किसानों ने प्रशासन और बिजली विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि बाजार पारा फीडर से पतेरापाली तक की विद्युत लाइन का शीघ्र निरीक्षण कर खराबी दूर की जाए। उन्होंने मांग की कि बिजली आपूर्ति नियमित और निर्बाध रूप से सुनिश्चित की जाए ताकि किसानों को सिंचाई के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े। किसानों ने यह भी कहा कि यदि विभाग की लापरवाही के कारण फसलों को नुकसान होता है तो प्रभावित किसानों का सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन यदि समय पर बिजली जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं होगी तो इन योजनाओं का पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाएगा। किसानों का मानना है कि कृषि क्षेत्र की सफलता के लिए सिंचाई और बिजली दोनों सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए इन सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुचारु रखना आवश्यक है।
फिलहाल क्षेत्र के किसान बिजली विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग कब तक विद्युत लाइन की मरम्मत कर बिजली आपूर्ति बहाल करता है। किसानों का कहना है कि यदि अगले एक-दो दिनों में बिजली नहीं आई तो लौकी सहित अन्य सब्जियों की फसल पूरी तरह खराब हो सकती है और उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में किसानों ने प्रशासन से संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल समाधान की मांग की है ताकि उनकी मेहनत, फसल और आजीविका को बचाया जा सके।