90% दिव्यांगता को हराकर रेशमा केवट ने रचा इतिहास, 12वीं में 89.75% अंक पर रायपुर में हुआ सम्मान

लगभग 90 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 में 89.75 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली रेशमा केवट को रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया। आरोहण वेलफेयर फाउंडेशन ने उनके संघर्ष, मेहनत और शैक्षणिक उपलब्धि को सम्मानित करते हुए उन्हें समाज और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

Jun 30, 2026 - 18:54
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90% दिव्यांगता को हराकर रेशमा केवट ने रचा इतिहास, 12वीं में 89.75% अंक पर रायपुर में हुआ सम्मान

UNITED NEWS OF ASIA. अवास कैवर्त, गौरेला पेंड्रा l कड़ी मेहनत, मजबूत संकल्प और आत्मविश्वास के बल पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है। इस बात को सच साबित किया है गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की मेधावी छात्रा रेशमा केवट ने। लगभग 90 प्रतिशत दिव्यांगता जैसी कठिन परिस्थिति के बावजूद उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड परीक्षा-2026 में 89.75 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। उनकी इस उपलब्धि पर रायपुर में आयोजित एक सम्मान समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया।

रायपुर स्थित आरोहण वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा आयोजित समारोह में रेशमा केवट को पुष्पगुच्छ, सम्मान-पत्र और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर फाउंडेशन के पदाधिकारी, समाज के वरिष्ठजन और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे संघर्ष, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

रेशमा केवट भारतीय जनता युवा मोर्चा के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला उपाध्यक्ष एकलव्य केवट की भतीजी हैं। बचपन से शारीरिक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को कभी नहीं छोड़ा। कठिन परिस्थितियों में भी नियमित अध्ययन, आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग से उन्होंने बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि रेशमा की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे केवट समाज के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि रेशमा ने यह साबित किया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और संकल्प मजबूत हो तो कोई भी बाधा सफलता की राह नहीं रोक सकती। उनकी उपलब्धि समाज के युवाओं, विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने रेशमा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी। फाउंडेशन ने उनके संघर्ष और उपलब्धि को समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया तथा भविष्य में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की शुभकामनाएं दीं।

रेशमा केवट की सफलता यह संदेश देती है कि शारीरिक सीमाएं किसी व्यक्ति की क्षमता और सपनों को सीमित नहीं कर सकतीं। कठिनाइयों के बीच भी निरंतर मेहनत, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण के सामने परिस्थितियां छोटी पड़ जाती हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांगजनों को शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों के बीच रेशमा जैसी छात्राओं की सफलता समाज के लिए प्रेरणादायक है। उनकी कहानी उन हजारों विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।