अनासर काल में भगवान जगन्नाथ को अर्पित किया गया औषधीय काढ़ा, रायपुर में निभाई गई प्राचीन परंपरा

रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में अनासर काल की परंपरा के तहत भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को औषधीय काढ़े का भोग अर्पित किया गया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान सनातन परंपरा, आयुर्वेद और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया गया।

Jul 3, 2026 - 10:40
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अनासर काल में भगवान जगन्नाथ को अर्पित किया गया औषधीय काढ़ा, रायपुर में निभाई गई प्राचीन परंपरा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में अनासर काल की प्राचीन परंपरा का विधि-विधान के साथ पालन किया गया। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को विशेष औषधीय काढ़े का भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस आध्यात्मिक आयोजन में सहभागिता की।

जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष एवं रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि देव स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के जल से महास्नान कराया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार महास्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और इसके बाद 15 दिनों तक अनासर काल यानी एकांतवास में रहते हैं। इस अवधि में भगवान के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं तथा उनकी विशेष आयुर्वेदिक पद्धति से सेवा की जाती है।

उन्होंने बताया कि अनासर काल के तीसरे दिन भगवान को औषधीय जड़ी-बूटियों, देशी मसालों और प्राकृतिक फलों से तैयार विशेष काढ़े का भोग लगाया जाता है। इस दौरान भगवान को सामान्य छप्पन भोग नहीं लगाया जाता, बल्कि स्वास्थ्य लाभ की भावना से औषधीय पेय और फलों का रस अर्पित किया जाता है। यह परंपरा सदियों से ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में निभाई जाती रही है और उसी परंपरा का पालन रायपुर के मंदिर में भी श्रद्धापूर्वक किया जाता है।

पुरंदर मिश्रा ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की प्रत्येक परंपरा भारतीय संस्कृति, आयुर्वेद, प्रकृति संरक्षण और संयमपूर्ण जीवन का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि अनासर काल केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और भारतीय जीवन दर्शन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परंपरा भी है। इन परंपराओं का संरक्षण और नई पीढ़ी तक उनका संदेश पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से अनासर काल की मर्यादाओं का पालन करने और भगवान जगन्नाथ की आराधना करने का आह्वान किया। साथ ही आगामी रथयात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील भी की।

मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विशेष पूजा-विधि संपन्न की गई और भगवान को औषधीय काढ़े का भोग अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति और आस्था के साथ पूजा-अर्चना कर भगवान से सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। आयोजन के माध्यम से सनातन संस्कृति और प्राचीन धार्मिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश भी दिया गया।