किसान की मौत पर बिजली विभाग ने मानी लापरवाही, मुआवजा और कार्रवाई के आश्वासन के बाद 6 घंटे का धरना समाप्त
दुर्ग जिले के ग्राम चिंगरी में करंट लगने से किसान बीरेन्द्र देशमुख की मौत के बाद ग्रामीणों का छह घंटे तक चला धरना प्रदर्शन बिजली विभाग के लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। विभाग ने मुआवजा, परिजनों को नौकरी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l जिले के अंडा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चिंगरी में करंट लगने से किसान बीरेन्द्र देशमुख (60) की मौत के बाद शुरू हुआ ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन छह घंटे बाद समाप्त हो गया। बिजली विभाग द्वारा अपनी लापरवाही स्वीकार करने, मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने धरना समाप्त कर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की।
जानकारी के अनुसार किसान बीरेन्द्र देशमुख की करंट लगने से मौत के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कथित लापरवाही को घटना के लिए जिम्मेदार बताते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि क्षेत्र में विद्युत लाइन और तारों की खराब स्थिति की शिकायत पहले भी विभाग को लिखित रूप से दी गई थी, लेकिन समय रहते सुधार नहीं किया गया। इसी लापरवाही के कारण एक किसान की जान चली गई।
धरना-प्रदर्शन के दौरान प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों एवं परिजनों से लगातार चर्चा की। कई दौर की बातचीत के बाद बिजली विभाग ने लिखित रूप से अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए मृतक के परिवार को राहत देने पर सहमति जताई।
समझौते के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए तत्काल 1.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त बिजली विभाग की ओर से चार लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि भी दी जाएगी। मृतक के दोनों पुत्रों को आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने तथा घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का भी लिखित आश्वासन दिया गया।
धरना-प्रदर्शन के दौरान पूर्व जनपद पंचायत सभापति एवं कांग्रेस नेता विक्की मिश्रा भी परिजनों और ग्रामीणों के साथ मौजूद रहे। उन्होंने प्रशासन और ग्रामीणों के बीच समन्वय स्थापित करने में भूमिका निभाई। साथ ही मृतक के पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर की व्यवस्था भी कराई गई, जिससे अंतिम निर्णय होने तक शव सुरक्षित रखा जा सके।
मौके पर तहसीलदार, बिजली विभाग के सहायक अभियंता, एसडीओपी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों की मौजूदगी में लिखित सहमति बनने के बाद परिजनों ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया।
ग्रामीणों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल मुआवजा प्राप्त करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है। उन्होंने मांग की कि क्षेत्र की जर्जर विद्युत लाइनों और अन्य तकनीकी खामियों को जल्द दूर किया जाए ताकि किसी अन्य परिवार को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े। प्रशासन ने भी आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।