महिलाओं की सुरक्षा और पुनर्वास पर संसदीय समिति की बैठक, एसिड अटैक व यौन हिंसा पीड़ितों के लिए प्रभावी व्यवस्था पर मंथन

संसदीय समिति की बैठक में एसिड अटैक और यौन हिंसा की शिकार महिलाओं एवं बालिकाओं के पुनर्वास पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय महिला आयोग के अधिकारियों ने प्रस्तुति दी। सखी वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 112 और 181 की प्रभावशीलता बढ़ाने तथा पीड़िताओं को सुरक्षा, त्वरित न्याय और सम्मानजनक पुनर्वास उपलब्ध कराने के उपायों पर विचार किया गया।

Jul 1, 2026 - 12:31
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महिलाओं की सुरक्षा और पुनर्वास पर संसदीय समिति की बैठक, एसिड अटैक व यौन हिंसा पीड़ितों के लिए प्रभावी व्यवस्था पर मंथन

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और पुनर्वास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर संसदीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक का संचालन समिति की सभापति डॉ. डी. पुरंदेश्वरी ने किया। बैठक में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के प्रतिनिधियों तथा राष्ट्रीय महिला आयोग के अधिकारियों ने भाग लेते हुए एसिड अटैक एवं यौन हिंसा की शिकार महिलाओं और बालिकाओं के पुनर्वास से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

बैठक में देशभर में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 112 और 181 की वर्तमान कार्यप्रणाली, उनकी उपलब्धियों और चुनौतियों की समीक्षा की गई। साथ ही इन सेवाओं को और अधिक प्रभावी, सुलभ तथा पीड़ित महिलाओं के लिए उपयोगी बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन, सहायता तंत्र और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी समिति के समक्ष प्रस्तुत की।

प्रस्तुति के बाद समिति के सदस्यों ने इस विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक में भविष्य की कार्ययोजना, नीतिगत सुधार, संस्थागत समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सुझाव साझा किए गए। चर्चा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि एसिड अटैक और यौन हिंसा से प्रभावित महिलाओं एवं बालिकाओं को समय पर सुरक्षा, कानूनी सहायता, चिकित्सा सुविधा, मनोसामाजिक परामर्श, सम्मानजनक पुनर्वास और आत्मनिर्भर जीवन के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।

बैठक के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को और अधिक तेज, संवेदनशील तथा प्रभावी बनाया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि पुनर्वास योजनाओं का लाभ समय पर पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।

समिति के सदस्यों ने महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े तंत्र को मजबूत करने, हेल्पलाइन सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, वन स्टॉप सेंटरों की कार्यक्षमता में सुधार करने तथा जागरूकता कार्यक्रमों को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। बैठक में इस दिशा में कई महत्वपूर्ण सुझावों पर विचार किया गया, जिन्हें भविष्य की नीतियों और योजनाओं में शामिल किए जाने की संभावना पर चर्चा हुई।

बैठक के अंत में महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। यह भी कहा गया कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम, पीड़ितों के सम्मानजनक पुनर्वास और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं को समन्वित और संवेदनशील तरीके से कार्य करना होगा। समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रभावी नीतियों और मजबूत क्रियान्वयन के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।