स्वास्थ्य और महिला-बाल विकास योजनाओं की समीक्षा, कलेक्टर ने संस्थागत प्रसव और कुपोषण मुक्ति पर दिया जोर
नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक में संस्थागत प्रसव, ‘मायका सेंटर’, कुपोषण मुक्ति अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपुर l जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कलेक्टर नम्रता जैन की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों विभागों द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
समीक्षा के दौरान कलेक्टर नम्रता जैन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं, संस्थागत प्रसव, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियमित उपस्थिति बनाए रखने तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार लाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
कलेक्टर ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जिले में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के लिए सुनियोजित रणनीति बनाई जाए। उन्होंने ‘मायका सेंटर’ का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व सुरक्षित वातावरण, आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं और समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि इससे सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिलेगा और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलेगी।
बैठक में कलेक्टर ने जनजागरूकता को स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की स्वास्थ्य योजनाओं, स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए ऑडियो-वीडियो सामग्री तैयार की जाए तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग किया जाए। उनका कहना था कि जागरूकता बढ़ने से अधिक से अधिक लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।
महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन, पोषण आहार वितरण और कुपोषण मुक्ति अभियान की प्रगति का भी आकलन किया गया। कलेक्टर ने गंभीर कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एएनएम, मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया, ताकि पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध और प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सके।
बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. टी.आर. कंवर, जिला कार्यक्रम अधिकारी लुपेंद्र महिनाग, जिला कार्यक्रम प्रबंधक राजीव बघेल, सभी विकासखंड चिकित्सा अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी तथा स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में अधिकारियों ने योजनाओं की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की और भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा की।