रावघाट परियोजना में बिना अनुमति पेड़ कटाई का मामला, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा पर स्थित रावघाट लौह अयस्क परियोजना में कथित रूप से बिना वैधानिक अनुमति के बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और निर्माण कार्य किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय ने इस पर नाराजगी जताते हुए वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। मामले में भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

Jun 26, 2026 - 17:53
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रावघाट परियोजना में बिना अनुमति पेड़ कटाई का मामला, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. राजेन्द्र मंडावी, कांकेर l कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमा पर स्थित रावघाट लौह अयस्क परियोजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। परियोजना क्षेत्र में कथित रूप से बिना आवश्यक वैधानिक अनुमति के बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई, सड़क निर्माण और डंपिंग यार्ड विकसित किए जाने का मामला सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय में नाराजगी का माहौल है। इस पूरे घटनाक्रम ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि परियोजना क्षेत्र संरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य और पेड़ों की कटाई के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक होता है। इसके बावजूद लंबे समय तक निर्माण कार्य और वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई जारी रही। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी, तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।

ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय का कहना है कि जंगल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि उनकी आजीविका, संस्कृति और परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। उनका आरोप है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर पर्यावरणीय संतुलन और वन संरक्षण के नियमों की अनदेखी की गई है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

मामले को लेकर तत्कालीन पूर्व वन मंडल अधिकारी भानुप्रतापपुर ऋषभ जैन ने बताया कि रावघाट परियोजना क्षेत्र में सड़क निर्माण सहित अन्य कार्यों के लिए वन विभाग से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति पेड़ों की कटाई और निर्माण कार्य किए जाने के मामले में भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है और नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले ने पर्यावरण संरक्षण और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को एक बार फिर सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि विकास कार्यों के साथ-साथ वन संपदा और जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। यदि नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो इसका दीर्घकालीन प्रभाव पर्यावरण और स्थानीय समुदाय दोनों पर पड़ सकता है।

फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और सभी की नजरें वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियमों की अनदेखी किस स्तर पर हुई, जिम्मेदार कौन हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।