IIM रायपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का संबोधन, 552 छात्रों को मिली डिग्री
आईआईएम रायपुर के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में 552 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर । भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर ने अपने नया रायपुर स्थित परिसर में 15वां वार्षिक दीक्षांत समारोह भव्य रूप से आयोजित किया। इस अवसर पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और स्नातक हो रहे विद्यार्थियों को प्रेरणादायक संदेश दिया।
इस दीक्षांत समारोह में कुल 552 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें प्रमुख एमबीए कार्यक्रम के 314 छात्र, एग्जीक्यूटिव एमबीए के 230 छात्र और 8 डॉक्टरेट शोधार्थी शामिल थे। समारोह का माहौल उत्साह और गर्व से भरा हुआ था, जहां छात्र, अभिभावक और संकाय सदस्य इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के साक्षी बने।
अपने दीक्षांत भाषण में डॉ. एस. जयशंकर ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि यह बैच बेहद भाग्यशाली है, क्योंकि यह उस पीढ़ी का हिस्सा है जो ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने जिस तेजी से प्रगति की है, उसका लाभ इस पीढ़ी को मिला है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के युवाओं के पास तकनीक और सूचना तक अभूतपूर्व पहुंच है, जो उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाती है। वैश्वीकरण के इस दौर में भारत विश्व मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है और आने वाले वर्षों में देश के विकास में इन युवाओं की भूमिका बेहद अहम होगी।
डॉ. जयशंकर ने भारत की आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश ने अपनी मजबूती और लचीलापन साबित किया है। उन्होंने छात्रों को देश की प्रगति में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर आईआईएम रायपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष पुनीत डालमिया ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 2026 का बैच ऐसे समय में स्नातक हो रहा है जब दुनिया तेजी से बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल बदलाव जैसे मुद्दे भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं, ऐसे में छात्रों को निरंतर सीखते रहने और अनुकूलन क्षमता विकसित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने छात्रों को ईमानदारी और नेतृत्व क्षमता के साथ आगे बढ़ने का संदेश देते हुए कहा कि सफलता का वास्तविक मूल्य दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में है।
समारोह के दौरान मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। इनमें शिवांग छिकारा, शालिनी दुबे और बोबन चाको प्रमुख रहे। इस उपलब्धि ने संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता को और मजबूती प्रदान की है।
आईआईएम रायपुर ने अपने द्वितीय चरण के परिसर विस्तार और मजबूत प्लेसमेंट रिकॉर्ड के साथ प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान को और सुदृढ़ किया है। इस वर्ष औसत प्लेसमेंट पैकेज 20.93 लाख रुपये प्रति वर्ष रहा, जो संस्थान की गुणवत्ता और छात्रों की प्रतिभा को दर्शाता है।
कुल मिलाकर यह दीक्षांत समारोह न केवल छात्रों के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक बना, बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य की झलक भी प्रस्तुत करता है, जहां युवा नेतृत्व भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार है।