भारती महिला शक्ति फाउंडेशन पर सैकड़ों लोगों से कथित ठगी का आरोप, कई राज्यों के पीड़ितों ने जांच की मांग उठाई

रायपुर के सरोना स्थित भारती महिला शक्ति फाउंडेशन पर मशीन बिक्री और रोजगार दिलाने के नाम पर कथित ठगी के आरोप लगे हैं। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, बिहार और ओडिशा सहित कई राज्यों के पीड़ितों ने प्रशासन और पुलिस से निष्पक्ष जांच तथा राशि वापस दिलाने की मांग की है। कंपनी पर लगे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

Jun 30, 2026 - 12:17
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भारती महिला शक्ति फाउंडेशन पर सैकड़ों लोगों से कथित ठगी का आरोप, कई राज्यों के पीड़ितों ने जांच की मांग उठाई

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राजधानी रायपुर के सरोना स्थित भारती महिला शक्ति फाउंडेशन पर मशीनों की बिक्री और स्वरोजगार उपलब्ध कराने के नाम पर सैकड़ों लोगों से कथित ठगी करने के आरोप सामने आए हैं। प्रभावित लोगों का दावा है कि कंपनी ने दोना-पत्तल, नोटबुक और अन्य मशीनों के माध्यम से व्यवसाय स्थापित कराने तथा नियमित आय का भरोसा देकर लाखों रुपये जमा कराए, लेकिन वादे के अनुरूप सुविधाएं और सेवाएं उपलब्ध नहीं कराईं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पीड़ितों का कहना है कि इस मामले से छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, बिहार और ओडिशा सहित कई राज्यों के लोग प्रभावित हुए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कंपनी ने मशीन उपलब्ध कराने, कच्चा माल देने, तैयार माल की खरीद करने और निश्चित मासिक आय का आश्वासन दिया था। इन्हीं दावों के आधार पर अनेक लोगों ने बैंक ऋण लेकर निवेश किया।

ओडिशा के झारसुगुड़ा निवासी सुरेश कुमार ने आरोप लगाया कि वर्ष 2025 में उन्होंने नोटबुक निर्माण मशीन लगाने के लिए लगभग 18 लाख रुपये का बैंक ऋण लेकर कंपनी संचालक शैलेन्द्र रजक को भुगतान किया था। उनका कहना है कि निवेश के बावजूद उन्हें वादा किए गए लाभ और सुविधाएं नहीं मिलीं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कंपनी की ओर से बाय-बैक सिस्टम का भरोसा दिया गया था। दावा किया गया था कि मशीन के माध्यम से हर महीने 60 हजार से 70 हजार रुपये तक की आय होगी। साथ ही सात से दस दिनों के भीतर मशीन की डिलीवरी, दो से तीन टन कच्चा माल उपलब्ध कराने तथा तैयार माल की नियमित खरीद का भी आश्वासन दिया गया था।

पीड़ितों का आरोप है कि कई लोगों को मशीन निर्धारित समय पर नहीं मिली। कुछ लोगों को मशीन और कच्चा माल दो से तीन महीने बाद उपलब्ध कराया गया, जबकि मशीन पहुंचने के बाद उसके इंस्टॉलेशन में भी करीब दो महीने की देरी हुई। उनका यह भी कहना है कि बाद में कंपनी की ओर से फोन उठाना और संपर्क बनाए रखना भी बंद कर दिया गया।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कंपनी एक मशीन की कीमत लगभग 2.56 लाख रुपये और एक टन कच्चे माल के लिए लगभग 65 हजार रुपये वसूलती थी। उनका कहना है कि इसी प्रकार की मशीनें बाजार में अन्य कंपनियों द्वारा लगभग 1.18 लाख रुपये में उपलब्ध हैं। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें अधिक कीमत पर मशीनें उपलब्ध कराई गईं।

प्रभावित लोगों ने प्रशासन और पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपों की सत्यता की जांच करने, दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने तथा निवेशकों की राशि वापस दिलाने की मांग की है। फिलहाल यह आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं और संबंधित कंपनी या आरोपित पक्ष की प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। मामले में जांच के बाद ही तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।