दीपिका मौत मामले में संविदा लैब टेक्नीशियन बर्खास्त, वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं
दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल पीड़िता 22 वर्षीय दीपिका गाड़ा की मौत के मामले में संविदा लैब टेक्नीशियन तरन्नुम जहां को लापरवाही और असंवेदनशीलता के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। हालांकि जांच में कई वरिष्ठ डॉक्टरों की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. भारती कौर, दुर्ग l दुर्ग जिला अस्पताल में सिकल सेल पीड़िता 22 वर्षीय दीपिका गाड़ा की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए संविदा लैब टेक्नीशियन तरन्नुम जहां की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। विभाग ने उन पर लापरवाही और असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए बर्खास्तगी की कार्रवाई की है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है, क्योंकि जांच में वरिष्ठ अधिकारियों और चिकित्सकों की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार, दीपिका गाड़ा का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा था। मामले की जांच के दौरान उपचार प्रक्रिया और अस्पताल की व्यवस्थाओं में कई स्तरों पर कमियां सामने आने की बात कही गई। जांच रिपोर्ट में कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए, लेकिन अब तक किसी उच्च अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई कार्रवाई में केवल संविदा लैब टेक्नीशियन तरन्नुम जहां को सेवा से हटाया गया है। इस निर्णय के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि यदि जांच में अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी सामने आई है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
मामले को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि किसी गंभीर घटना में कई स्तरों पर लापरवाही सामने आती है, तो केवल एक कर्मचारी पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। जिम्मेदारी तय होने पर सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए।
दीपिका गाड़ा की मौत ने जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और उपचार व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि अस्पतालों में समय पर जांच, उपचार और समुचित निगरानी सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है, विशेषकर गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के मामलों में। ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को भी उजागर करती हैं।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई केवल संविदा कर्मचारी तक सीमित रहने से मामले में जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग मांग कर रहे हैं कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और जिन अधिकारियों या चिकित्सकों की जिम्मेदारी तय हुई है, उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इससे न केवल पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत होगी, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
दीपिका गाड़ा की मौत का मामला अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है और आगे विभाग की ओर से क्या अतिरिक्त कार्रवाई की जाती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।