आत्मानंद स्कूलों में फीस वसूली के फैसले का कांग्रेस ने किया विरोध, शिक्षा के अधिकार पर उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आत्मानंद स्कूलों में वार्षिक फीस वसूलने के कथित निर्णय का विरोध किया है। मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने इसे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की। उन्होंने मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रत्येक नागरिक का अधिकार बताया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार द्वारा स्वामी आत्मानंद स्कूलों में वार्षिक फीस वसूलने के कथित निर्णय का कड़ा विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि यह फैसला गरीब और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों के हितों के खिलाफ है तथा इससे मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उद्देश्य प्रभावित होगा।
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के ऐसे परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वामी आत्मानंद स्कूलों की शुरुआत की गई थी, जो निजी स्कूलों की महंगी फीस वहन करने में सक्षम नहीं थे। उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार इन स्कूलों में फीस लागू कर इस मूल उद्देश्य से पीछे हट रही है।
वंदना राजपूत ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान प्रदेश में लगभग 750 आत्मानंद स्कूल शुरू किए गए थे। भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाकर अधिक से अधिक सरकारी स्कूलों को आत्मानंद मॉडल में विकसित करने की योजना थी, ताकि सभी वर्गों के बच्चों को निशुल्क और बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि फीस वसूली का निर्णय इस सोच के विपरीत है और इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य प्रत्येक नागरिक का अधिकार है तथा इन्हें उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार इस जिम्मेदारी का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने में असफल रही है। उन्होंने सरकार से आत्मानंद स्कूलों में फीस वसूलने के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार बनने के बाद से आत्मानंद स्कूलों की व्यवस्थाओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उनके अनुसार कई स्कूलों में स्टेशनरी और आवश्यक सुविधाओं की कमी है तथा शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिलने जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। उनका दावा है कि इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
वंदना राजपूत ने कहा कि स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आई थी। उनके अनुसार निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में एक बच्चे की पढ़ाई पर हर महीने औसतन 8 से 9 हजार रुपये तक खर्च आता है, जिसे वहन करना अधिकांश परिवारों के लिए कठिन होता है। आत्मानंद स्कूलों ने ऐसे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा उपलब्ध कराई, जिससे अनेक बच्चों ने शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल कीं।
कांग्रेस ने कहा कि आत्मानंद स्कूलों की उपेक्षा और उनमें फीस लागू करने जैसे कदम शिक्षा के क्षेत्र में पीछे जाने के समान हैं। पार्टी ने राज्य सरकार से गरीब और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए फीस संबंधी निर्णय वापस लेने तथा स्कूलों की व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की मांग की