खाद वितरण में टोकन व्यवस्था समाप्त, किसान कांग्रेस ने फैसले को किसानों की जीत बताया

छत्तीसगढ़ सरकार ने सहकारी समितियों के माध्यम से खाद वितरण की टोकन व्यवस्था समाप्त करने की घोषणा की है। किसान कांग्रेस ने इसे अपने आंदोलन की सफलता बताते हुए किसानों की जीत करार दिया, जबकि सरकार ने रकबे के आधार पर सीधे खाद वितरण और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

Jul 2, 2026 - 13:25
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खाद वितरण में टोकन व्यवस्था समाप्त, किसान कांग्रेस ने फैसले को किसानों की जीत बताया

UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l छत्तीसगढ़ में खाद वितरण व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए टोकन प्रणाली समाप्त करने की घोषणा की है। अब किसान सहकारी समितियों से अपने बोए गए रकबे के आधार पर बिना टोकन सीधे खाद प्राप्त कर सकेंगे। इस निर्णय के बाद छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस ने इसे किसानों के आंदोलन की सफलता और अन्नदाताओं की बड़ी जीत बताया है।

किसान कांग्रेस का दावा है कि प्रदेशभर में खाद की कमी, प्रति एकड़ खाद वितरण में कटौती तथा टोकन जैसी व्यवस्थाओं के विरोध में पार्टी द्वारा लगातार आंदोलन, बैलगाड़ी यात्रा और कलेक्ट्रेट घेराव किए गए थे। संगठन का कहना है कि इन आंदोलनों के बाद सरकार को अपनी व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा।

सरकार की नई व्यवस्था के अनुसार अब किसानों को टोकन लेने की आवश्यकता नहीं होगी। सहकारी समितियां किसानों को उनके पंजीकृत रकबे के आधार पर सीधे खाद उपलब्ध कराएंगी। इसके साथ ही कृषि विभाग को खाद की कृत्रिम कमी पैदा करने, जमाखोरी और कालाबाजारी करने वाले बिचौलियों तथा निजी विक्रेताओं पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। अनियमितता पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई भी की जाएगी। सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने की बात भी कही है।

छत्तीसगढ़ किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रदेश के किसानों के संघर्ष की जीत है। उनका कहना है कि टोकन व्यवस्था समाप्त होना किसान कांग्रेस की नौ सूत्रीय मांगों की दिशा में सरकार का पहला कदम है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन की अन्य मांगें अभी भी लंबित हैं और उन्हें पूरा किए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने किसानों को ₹3100 की एकमुश्त राशि, पिछले तीन वर्षों के बोनस के भुगतान और अघोषित बिजली कटौती समाप्त करने जैसी मांगों का भी उल्लेख किया।

दुर्ग संभाग के किसान कांग्रेस सह-प्रभारी बेनू साहू ने कहा कि पहले प्रति एकड़ सीमित मात्रा में खाद उपलब्ध कराने और उसे किश्तों में वितरित करने की व्यवस्था किसानों के लिए व्यावहारिक नहीं थी। उनका कहना है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को समय पर पर्याप्त खाद मिलना आवश्यक है, इसलिए नई व्यवस्था किसानों के लिए राहत लेकर आई है।

किसान कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए शेष मांगों पर भी शीघ्र निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है। वहीं सरकार का उद्देश्य खरीफ सीजन के दौरान किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना, वितरण व्यवस्था को सरल बनाना और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना बताया गया है। आने वाले समय में इस नई व्यवस्था का असर किसानों तक खाद की उपलब्धता और वितरण प्रणाली पर किस प्रकार पड़ता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।