प्राकृतिक और जैविक खेती ही भविष्य का आधार, किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने की अपील: बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भाटापारा में आयोजित जिला स्तरीय तिलहन मेला एवं जैविक कृषि कार्यशाला में किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लगातार एक ही फसल लेने से मिट्टी की उर्वरकता घट रही है और भविष्य में भूमि बंजर होने का खतरा बढ़ सकता है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भाटापारा में आयोजित राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) के अंतर्गत जिला स्तरीय तिलहन मेला एवं जैविक कृषि कार्यशाला में किसानों से प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि छत्तीसगढ़ की धरती की उर्वरकता और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रखना है तो किसानों को फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती की ओर लौटना होगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान समय में अधिकांश किसान केवल धान की खेती पर निर्भर हो गए हैं। लगातार एक ही फसल लेने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता प्रभावित हो रही है और अधिक उत्पादन के लिए रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग भविष्य में भूमि को बंजर बना सकता है। उन्होंने कहा कि फसल चक्र अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और उत्पादन भी बेहतर होता है।
उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि अपने परिवार के उपयोग के लिए कम से कम आवश्यक मात्रा में धान और अन्य खाद्यान्नों का उत्पादन जैविक पद्धति से करें। गोबर खाद और गौमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि स्वस्थ भोजन ही स्वस्थ समाज की नींव है। यदि आज प्राकृतिक खेती नहीं अपनाई गई तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है।
बृजमोहन अग्रवाल ने पशुपालन के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि पहले गांवों में पशुधन समृद्धि का प्रतीक माना जाता था, लेकिन अब यह परंपरा कमजोर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को सफल बनाने के लिए पशुपालन को भी बढ़ावा देना आवश्यक है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और जैविक खेती के लिए आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध होंगे।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कृषि विकास संबंधी विजन का उल्लेख करते हुए किसानों को खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसान अपनी भूमि का एक हिस्सा फल एवं सब्जियों, एक हिस्सा पशुपालन, मत्स्य पालन या मुर्गी पालन तथा शेष भाग में अन्य फसलों के लिए उपयोग करें। इससे वर्षभर आय के विभिन्न स्रोत बने रहेंगे और खेती अधिक लाभदायक होगी।
सांसद ने आधुनिक कृषि तकनीकों जैसे नेट हाउस, पॉली हाउस और ड्रिप सिंचाई अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों की बाजार में लगातार मांग बढ़ रही है और इनकी कीमत भी सामान्य कृषि उत्पादों की तुलना में अधिक मिलती है। इसलिए जैविक खेती किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन सकती है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता राशि और प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, मंत्री टंकराम वर्मा, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, शिवरतन शर्मा, आलोक सिंह ठाकुर, अश्विनी शर्मा, सनम जांगड़े सहित अनेक जनप्रतिनिधि, कृषि विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।