भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान

भोरमदेव जंगल सफारी ने संचालन के पहले ही महीने में छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म को नई पहचान दी है। एक माह में 489 से अधिक पर्यटक यहां पहुंचे, जिससे स्थानीय युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और वन प्रबंधन समिति को पौने तीन लाख रुपये से अधिक की आय हुई। यह पहल पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार और आर्थिक विकास का नया मॉडल बनकर उभरी है।

Jun 26, 2026 - 17:39
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भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा l कबीरधाम जिले में शुरू की गई भोरमदेव जंगल सफारी ने संचालन के पहले ही महीने में छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म को नई पहचान दिलाई है। प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीवों के शौकीनों और रोमांच पसंद पर्यटकों के लिए यह सफारी तेजी से आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है। इस पहल ने न केवल पर्यटन को बढ़ावा दिया है, बल्कि स्थानीय युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और वन प्रबंधन समितियों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित किए हैं

राज्य सरकार की इको-टूरिज्म नीति के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा तथा वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विकसित इस जंगल सफारी का उद्घाटन 3 मई 2026 को किया गया था। 4 मई से पर्यटकों के लिए इसका संचालन शुरू हुआ, जबकि मानसून के कारण 4 जून से इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। महज एक महीने के संचालन के दौरान 489 से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया, जिससे लगभग पौने तीन लाख रुपये की आय प्राप्त हुई।

वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि इस पहल का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय समुदाय को मिला है। सफारी में वाहन चालक, गाइड और गेट कीपर के रूप में कार्यरत 17 स्थानीय युवाओं ने एक माह में 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की। इसके अलावा वन प्रबंधन समिति को 92 हजार रुपये तथा वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। सफारी परिसर में संचालित महिला स्व-सहायता समूह की कैंटीन ने भी 20 हजार रुपये से अधिक का लाभ अर्जित किया, जिससे समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

भोरमदेव जंगल सफारी के साथ विकसित प्राकृतिक उद्यान भी पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। जंगल सफारी का आनंद लेने वाले पर्यटकों के अलावा 1500 से अधिक लोगों ने उद्यान का भ्रमण किया। इससे स्पष्ट है कि भोरमदेव क्षेत्र अब राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

करीब 36 किलोमीटर लंबे जंगल सफारी मार्ग पर पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण के बीच कई वन्यजीवों और पक्षियों को देखने का अवसर मिला। सफारी के दौरान भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, बार्किंग डियर, बाघ के पदचिह्न, जंगली मुर्गा, विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और रंग-बिरंगी तितलियां पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। घने जंगल, पहाड़ियां और प्राकृतिक सौंदर्य ने इस सफारी को यादगार अनुभव बना दिया है।

लगभग 352 वर्ग किलोमीटर में फैले भोरमदेव अभयारण्य में विकसित यह सफारी भोरमदेव मंदिर के समीप करियाआमा क्षेत्र से शुरू होती है। यहां आने वाले पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक वन संपदा और वन्यजीवों को करीब से देखने का अवसर मिलता है। राज्य सरकार की यह पहल पर्यटन विकास के साथ स्थानीय रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सफल उदाहरण बनकर सामने आई है। बारिश के बाद नवंबर माह से जंगल सफारी का संचालन पुनः शुरू किया जाएगा, जिससे पर्यटन गतिविधियों को एक बार फिर गति मिलने की उम्मीद है।