वैदिक शिक्षा और संस्कारों का संदेश लेकर लौटा आर्य समाज का प्रतिनिधिमंडल, गुरुकुलों की प्रेरक यात्रा संपन्न
आचार्य अजय आर्य के नेतृत्व में आर्य समाज भिलाई के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के विभिन्न गुरुकुलों, गौशालाओं, आयुर्वेद एवं पंचकर्म केंद्रों का अध्ययन भ्रमण किया। यात्रा के दौरान वैदिक शिक्षा, गौसेवा, संस्कार, आयुर्वेद और सेवा कार्यों का अवलोकन करते हुए समाज में गुरुकुल शिक्षा को मजबूत बनाने का आह्वान किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. वैदिक शिक्षा, सेवा, संस्कार और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से आचार्य अजय आर्य के नेतृत्व में आर्य समाज भिलाई के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के विभिन्न गुरुकुलों, गौशालाओं, आयुर्वेद एवं पंचकर्म केंद्रों का अध्ययन एवं सेवा भ्रमण किया। इस प्रेरणादायी यात्रा में अंकित शर्मा शास्त्री, प्रवीण गुप्ता, दीपा गुप्ता, सुदर्शन गुप्ता, सुनीता गुप्ता और धीरज शास्त्री शामिल रहे।
यात्रा के प्रथम चरण में प्रतिनिधिमंडल ने महासमुंद जिले के गुरुकुल कोसरंगी का भ्रमण किया। यहां वैदिक शिक्षा, गौसेवा और सेवा प्रकल्पों का अवलोकन किया गया। गुरुकुल में लगभग 100 ब्रह्मचारी अध्ययनरत हैं, जबकि 500 से अधिक गौमाताओं की सेवा, वृद्धाश्रम और आधुनिक हाइड्रोलिक गौ एम्बुलेंस जैसी व्यवस्थाओं ने प्रतिनिधिमंडल को प्रभावित किया।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल गुरुकुल आश्रम आमसेना (खरियार रोड) पहुंचा, जहां आयुष्काम महायज्ञ में सहभागिता करते हुए संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। भ्रमण के दौरान वैदिक गुरुकुल, यज्ञशाला, गौशाला, आयुर्वेद एवं पंचकर्म केंद्रों का निरीक्षण किया गया। प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों जैसे मड बाथ, शिरोधारा और अन्य आयुर्वेदिक उपचारों की जानकारी भी प्रतिनिधिमंडल ने प्राप्त की। इस दौरान अनेक संतों, संन्यासियों और विद्वान आचार्यों से मुलाकात कर उनका मार्गदर्शन लिया गया।
यात्रा के अगले चरण में प्रतिनिधिमंडल ने कन्या गुरुकुल आमसेना तथा कन्या गुरुकुल बीकेबाहरा का भ्रमण किया। वहां अध्ययनरत ब्रह्मचारिणियों की अनुशासित दिनचर्या, वैदिक शिक्षा और संस्कारमय वातावरण की सराहना की गई। आचार्य अजय आर्य ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य संस्कारित बेटियों और मूल्य आधारित शिक्षा पर निर्भर करता है। उन्होंने समाज से गुरुकुलों के विकास और विस्तार में सहयोग देने का आह्वान किया।
आचार्य अजय आर्य ने कहा कि गुरुकुल केवल शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि चरित्र निर्माण, राष्ट्रसेवा, स्वावलंबन और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के केंद्र हैं। उन्होंने ब्रह्मचारियों के अनुशासन, सेवा-भाव और तेजस्वी व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे विद्यार्थी भविष्य में देश और समाज का गौरव बढ़ाएंगे। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, "आएँगे ख़त अरब से जिसमें लिखा यह होगा— गुरुकुल का ब्रह्मचारी हलचल मचा रहा है।"
यात्रा के समापन पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक गुरुकुल उनके लिए केवल शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि संस्कारों का घर और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। उन्होंने कहा कि गुरुकुलों से विदा लेते समय वही भावनात्मक अनुभूति होती है, जैसी किसी व्यक्ति को अपने मायके से विदा होते समय होती है। प्रतिनिधिमंडल ने एक स्वर में कहा कि यदि भारत को पुनः विश्वगुरु बनाना है तो गुरुकुल शिक्षा, वैदिक संस्कृति, गौसेवा, आयुर्वेद और संस्कार आधारित शिक्षा को समाज के सहयोग से और अधिक सशक्त बनाना होगा। उनका विश्वास है कि गुरुकुलों से तैयार होने वाली नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।