वृद्धाश्रमों में सेवा अभियान, समाजसेवियों ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ बिताए आत्मीय पल

आचार्य अजय आर्य के नेतृत्व में समाजसेवियों ने पुलगांव वृद्धाश्रम और पद्मनापुर खुला आश्रम में सेवा अभियान चलाया। प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ नागरिकों से संवाद कर उनका हालचाल जाना, उनकी आवश्यकताओं को समझा और समाज में बुजुर्गों के सम्मान एवं सेवा का संदेश दिया।

Jun 27, 2026 - 15:42
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वृद्धाश्रमों में सेवा अभियान, समाजसेवियों ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ बिताए आत्मीय पल

UNITED NEWS OF ASIA. मानव सेवा को सर्वोच्च धर्म मानते हुए आचार्य अजय आर्य के नेतृत्व में समाजसेवियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलगांव वृद्धाश्रम और पद्मनापुर खुला आश्रम पहुंचकर सेवा एवं संवेदना का प्रेरक अभियान चलाया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ आत्मीय समय बिताया, उनका हालचाल जाना और उन्हें अपनत्व एवं सम्मान का संदेश दिया।

सेवा अभियान में हेमा सक्सेना, आशुतोष सिंह, नमित क्षत्रिय और ऋचा टुकटुक ने वृद्धाश्रम में रह रहे वरिष्ठ नागरिकों से व्यक्तिगत रूप से संवाद किया। उन्होंने उनके जीवन के अनुभव सुने, आवश्यकताओं को समझा और उनके साथ समय बिताकर भावनात्मक सहयोग प्रदान किया। प्रतिनिधिमंडल का मानना था कि वृद्धजनों को केवल भोजन और दवाइयों की ही नहीं, बल्कि आत्मीय संवाद, सम्मान और स्नेह की भी आवश्यकता होती है।

आचार्य अजय आर्य ने वृद्धाश्रम में मौजूद वरिष्ठ नागरिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने आश्रम के प्रबंधन से भी चर्चा कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने वरिष्ठ नागरिकों के प्रति कितना संवेदनशील है। उनके अनुसार वृद्धजन समाज के अनुभव, संस्कार और जीवन मूल्यों की अमूल्य धरोहर हैं तथा उनकी सेवा भारतीय संस्कृति का मूल आदर्श है।

आचार्य अजय आर्य ने कहा कि वृद्ध माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की सेवा करना केवल सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि मानवता की सच्ची साधना है। उन्होंने समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति से समय-समय पर वृद्धाश्रमों में पहुंचकर वरिष्ठ नागरिकों के साथ समय बिताने और उनकी भावनाओं को समझने का आह्वान किया।

हेमा सक्सेना ने कहा कि वृद्धजनों के बीच बिताया गया समय जीवन को नई संवेदनशीलता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सेवा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी की पीड़ा को सुनना, उसका हाथ थामना और उसे यह विश्वास दिलाना कि वह अकेला नहीं है, यही वास्तविक सेवा है।

नमित क्षत्रिय ने कहा कि वर्तमान समय में परिवारों और समाज को अपने वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनने की आवश्यकता है। वहीं आशुतोष सिंह ने कहा कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य है और वृद्धजनों का आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। ऋचा टुकटुक ने भी इस अनुभव को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के संघर्ष, धैर्य और जीवन मूल्यों से नई पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है।

कार्यक्रम के अंत में सभी समाजसेवियों ने वरिष्ठ नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य और सुखद जीवन की कामना की तथा भविष्य में भी नियमित रूप से ऐसे सेवा कार्य जारी रखने का संकल्प लिया। यह सेवा अभियान नीता दास एवं शिपि आर्य के सहयोग से संपन्न हुआ, जिनके सहयोग से वृद्धजनों के सम्मान, सेवा और आत्मीयता का यह प्रेरणादायक प्रयास सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।