9 करोड़ की ठगी का खुलासा: फर्जी वर्क ऑर्डर बनाकर कंपनी से करोड़ों की हेराफेरी, आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 9 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में फरार आरोपी सुभाष शर्मा को राजस्थान के ब्यावर से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी वर्क ऑर्डर, नकली ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड और फर्जी कंपनियों के जरिए लॉजिस्टिक्स कंपनी से करोड़ों रुपये की हेराफेरी करने का आरोप है।

Jun 22, 2026 - 13:08
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9 करोड़ की ठगी का खुलासा: फर्जी वर्क ऑर्डर बनाकर कंपनी से करोड़ों की हेराफेरी, आरोपी गिरफ्तार

UNITED NEWS OF ASIA. दिल्ली l दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश करते हुए 9 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में फरार आरोपी सुभाष शर्मा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने जिस लॉजिस्टिक्स कंपनी में वह मैनेजर और अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत था, उसी कंपनी के साथ विश्वासघात करते हुए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की।

जांच एजेंसियों के मुताबिक सुभाष शर्मा करीब पांच वर्षों से कंपनी में कार्यरत था। लंबे समय तक कंपनी में जिम्मेदार पद पर रहने के कारण प्रबंधन को उस पर पूरा भरोसा था। आरोप है कि इसी विश्वास का फायदा उठाकर उसने वित्तीय प्रक्रियाओं में हेरफेर कर करीब 9 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से फर्जी वर्क ऑर्डर तैयार करता था और उनके आधार पर ट्रकों की एडवांस पेमेंट कंपनी से जारी करवाता था। इसके लिए उसने नकली ट्रांसपोर्टरों और फर्जी सप्लायरों के नाम का इस्तेमाल किया। जांच के दौरान यह भी पता चला कि माल ढुलाई के फर्जी रिकॉर्ड और नकली डिलीवरी रसीदें तैयार कर भुगतान हासिल किया जाता था।

EOW के अधिकारियों के अनुसार रिकॉर्ड में जिन वाहनों को भारी मात्रा में माल ढुलाई करने वाला दिखाया गया था, वे वास्तव में इतनी क्षमता नहीं रखते थे। इससे स्पष्ट हुआ कि दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया था। पुलिस को संदेह है कि धोखाधड़ी को छिपाने के लिए कई स्तरों पर दस्तावेजों में हेरफेर किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कई फर्जी कंपनियां और बैंक खाते तैयार किए थे। कंपनी से निकाली गई रकम पहले इन खातों में भेजी जाती थी और बाद में नकद निकासी या अन्य खातों में ट्रांसफर के माध्यम से धन को इधर-उधर किया जाता था। पुलिस को कई ऐसे चेक भी मिले हैं जो बंद खातों से जुड़े थे या जिनका संबंधित ग्राहकों से कोई संबंध नहीं था।

मामला दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा। पुलिस के अनुसार वह दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में छिपकर रह रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कथित रूप से अपनी पहचान और पते में भी बदलाव करने की कोशिश की। अदालत द्वारा उसे भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद EOW की टीम उसकी तलाश में लगातार जुटी हुई थी।

तकनीकी निगरानी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर पुलिस को आरोपी के राजस्थान के ब्यावर में छिपे होने की जानकारी मिली। इसके बाद 18 जून 2026 को विशेष टीम ने कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

EOW अब आरोपी से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने यह पूरी धोखाधड़ी अकेले की या फिर इसमें किसी संगठित गिरोह अथवा अन्य सहयोगियों की भी संलिप्तता थी। मामले की विस्तृत जांच जारी है।