कॉरपोरेट मित्रों का हजारों करोड़ माफ करने वाली भाजपा अब गांव, गरीब, किसान से वसूलेगी टैक्स : विनोद चंद्राकर
महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने पंचायतों से ग्रामीण परिवारों पर स्थानीय कर लगाने को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायतों को सालाना 1200 रुपये तक प्रकाश कर, सफाई कर और अन्य स्थानीय करों की वसूली के लिए दबाव दिया जा रहा है तथा वसूली नहीं होने पर फंड में कटौती की धमकी दी जा रही है। चंद्राकर ने इसे गरीब, किसान और मजदूर विरोधी फैसला बताते हुए सरकार से कथित फरमान वापस लेने की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने पंचायतों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों से स्थानीय कर वसूली को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की ओर से महासमुंद जिले सहित छत्तीसगढ़ की पंचायतों पर ग्रामीण परिवारों से टैक्स वसूली शुरू करने का दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, प्रकाश कर, सफाई कर और अन्य स्थानीय करों के नाम पर प्रत्येक परिवार से सालाना 1200 रुपये तक वसूली की तैयारी है।
विनोद चंद्राकर ने आरोप लगाया कि टैक्स की वसूली नहीं करने पर पंचायतों को मिलने वाले फंड में कटौती की धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पंचायतों को जनता से पैसा वसूलने के लिए मजबूर करना पंचायती राज व्यवस्था की भावना के विपरीत है। चंद्राकर ने इसे गांव, गरीब, किसान और मजदूर पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया।
पूर्व विधायक ने कहा कि पिछले वर्षों में किसानों और ग्रामीणों को महंगाई, महंगे खाद-डीजल, रोजगार और ग्रामीण सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। उन्होंने मनरेगा, ग्रामीण सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मिलने वाली राशि को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। चंद्राकर ने कहा कि जब पंचायतों के संसाधन सीमित हैं, तब उनसे अपने स्तर पर राजस्व जुटाने की अपेक्षा करना उचित नहीं है।
उन्होंने परफॉर्मेंस ग्रांट की व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। चंद्राकर का आरोप है कि पंचायतों को यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि वे ग्रामीणों से कर वसूली नहीं करेंगी तो विकास के लिए मिलने वाली राशि प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन पंचायतों में बड़ी संख्या में गरीब, किसान और मजदूर परिवार रहते हैं, वे अतिरिक्त कर का बोझ कैसे उठाएंगे।
चंद्राकर ने कहा कि सालाना 1200 रुपये का अतिरिक्त भार ग्रामीण परिवारों के लिए मामूली नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जिस परिवार के लिए महीने का घरेलू खर्च चलाना चुनौती है, वह अतिरिक्त टैक्स कैसे देगा। उन्होंने किसान, विधवा पेंशन पर निर्भर परिवार और आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीणों का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार को कर लगाने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति पर विचार करना चाहिए।
पूर्व विधायक ने भाजपा सरकार पर कॉरपोरेट क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों और कॉरपोरेट क्षेत्र को हजारों करोड़ रुपये की राहत दी जाती है, जबकि दूसरी ओर गांव के गरीब परिवारों से टैक्स वसूली की तैयारी की जा रही है। चंद्राकर ने इसे सरकार की दोहरी नीति बताते हुए कहा कि गांवों को राजस्व वसूली का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गांव देश की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और कृषि व्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के बजाय सरकार को पंचायतों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारियों का भार राज्यों और पंचायतों पर डाल रही है।
विनोद चंद्राकर ने कहा कि यदि ग्रामीण परिवारों पर टैक्स का यह कथित दबाव वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच उठाएगी। उन्होंने सरकार से पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने और गरीब, किसान एवं मजदूरों पर अतिरिक्त कर का बोझ नहीं डालने की मांग की।