छात्रों के एक वर्ग के अनुसार, उन्हें नाटक में हिस्सा लेने के लिए बार-बार कहा गया। छात्रों का दावा है कि नाटक की विषयवस्तु में राजनीतिक संदर्भ हैं, जिसके कारण कुछ छात्र इसमें शामिल नहीं होना चाहते थे। एक छात्र ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन बैठक के दौरान उन्हें बताया गया कि नाटक में हिस्सा नहीं लेने की स्थिति में आंतरिक परीक्षा के अंक और प्रोजेक्ट के मूल्यांकन पर असर पड़ सकता है। यह आरोप छात्रों की ओर से लगाया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
प्राचार्य ने आरोपों से किया इनकार
कॉलेज की प्राचार्य मधुमंजरी मंडल ने छात्रों पर दबाव बनाए जाने के आरोप को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि कॉलेज में आयोजित कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की भागीदारी स्वैच्छिक है और किसी छात्र को नाटक में हिस्सा लेने के लिए बाध्य नहीं किया गया। उनके अनुसार, कॉलेज राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन से जुड़े वर्षों के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
प्राचार्य के मुताबिक, ड्रामा क्लब के कुछ सदस्यों से नाटक में भाग लेने के लिए कहा गया था। जब कुछ छात्रों ने इसमें हिस्सा लेने से इनकार किया तो कॉलेज ने उनके निर्णय को स्वीकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि नाटक में भाग नहीं लेने वाले छात्रों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
नाटक में राजनीतिक संदर्भ होने का दावा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, छात्रों ने नाटक की विषयवस्तु को लेकर भी आपत्ति जताई है। कुछ छात्रों का दावा है कि नाटक में राजनीतिक संदर्भों के साथ दर्शकों से ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने की अपील भी शामिल है। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि नाटक का मंचन 29 सितंबर को कॉलेज के सभागार में प्रस्तावित है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल के सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन के वर्षों के उपलक्ष्य में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान के तहत नाटक, चित्रकला और भाषण जैसी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
इस पूरे मामले में फिलहाल छात्रों के आरोप और कॉलेज प्रशासन का पक्ष सामने आया है। छात्रों द्वारा लगाए गए दबाव और अंक प्रभावित करने की चेतावनी के आरोपों पर किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक निष्कर्ष की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में विवाद के दोनों पक्षों को अलग-अलग दावों के रूप में देखना जरूरी है।