सांसद विजय बघेल ने पंडवानी की अमर स्वर सम्राज्ञी तीजन बाई को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल ने ग्राम गनियारी पहुंचकर पंडवानी की महान लोक कलाकार, पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने तीजन बाई के निधन को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि उनकी कला और विरासत सदैव अमर रहेगी।

Jul 5, 2026 - 14:53
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सांसद विजय बघेल ने पंडवानी की अमर स्वर सम्राज्ञी तीजन बाई को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल ने छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका और भारतीय लोककला की महान हस्ती डॉ. तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए ग्राम गनियारी पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर के दर्शन किए। उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

विजय बघेल ने कहा कि 8 अगस्त 1956 को जन्मी तीजन बाई ने अपनी असाधारण प्रतिभा, कठोर साधना और लोककला के प्रति अटूट समर्पण के बल पर पंडवानी जैसी पारंपरिक कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी विशिष्ट प्रस्तुति शैली, प्रभावशाली वाणी और जीवंत अभिनय के माध्यम से दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाया। उनकी कला में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोकजीवन और परंपराओं की गहरी झलक दिखाई देती थी।

उन्होंने कहा कि तीजन बाई का निधन केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक दुनिया के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने जीवनभर लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य किया तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।

विजय बघेल ने कहा कि तीजन बाई ने यह साबित किया कि यदि प्रतिभा, समर्पण और निरंतर परिश्रम हो तो गांव की मिट्टी से निकलकर भी विश्व के सर्वोच्च मंचों तक पहुंचा जा सकता है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया और भारतीय लोक परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। यही कारण है कि उनका नाम भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।

उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि तीजन बाई भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी अमर आवाज, संघर्ष, साधना और लोककला के प्रति समर्पण सदैव जीवित रहेगा। उनकी प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक योगदान आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और लोक परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी नम आंखों से तीजन बाई को अंतिम विदाई दी। सभी ने उनके योगदान को नमन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने अपनी एक ऐसी सांस्कृतिक विभूति को खो दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उनकी विरासत और लोककला के प्रति समर्पण हमेशा देश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में याद किया जाएगा।