वेदांता हादसा श्रम विभाग की लापरवाही का परिणाम: सुशील सन्नी अग्रवाल
वेदांता प्लांट हादसे को लेकर सुशील सन्नी अग्रवाल ने श्रम विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। इस मामले में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के पूर्व चेयरमैन सुशील सन्नी अग्रवाल ने श्रम विभाग और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि वेदांता प्लांट में बॉयलर फटने से लगभग 14 मजदूरों की मौत होना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि श्रम विभाग की घोर लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में उद्योगों में इस प्रकार की घटनाएं आम होती जा रही हैं, लेकिन सरकार इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही है।
अग्रवाल ने कहा कि इंडस्ट्रियल हेल्थ एंड सेफ्टी से जुड़ा विभाग केवल औपचारिकता निभा रहा है और सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कागजों में ही नियमों का पालन दिखाया जाता है, जबकि वास्तविकता में श्रमिकों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने श्रम मंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें श्रमिकों की सुरक्षा की चिंता करने का समय नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में केवल कमीशनखोरी का खेल चल रहा है और नए श्रम कानून भी केवल दिखावा बनकर रह गए हैं।
अग्रवाल ने यह भी कहा कि यह स्थिति केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में मजदूरों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। निर्माण स्थलों और औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं, जिससे लगातार हादसे हो रहे हैं।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि इस हादसे में मृत मजदूरों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए और उनके परिवारों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी सरकार उठाए। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
अग्रवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार इस मामले में जल्द ठोस कदम नहीं उठाती है, तो कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर उग्र आंदोलन करेगी।
यह घटना एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या उपाय किए जाते हैं।