शिक्षकों के अनुसार वर्ष 2001 से 2011 के बीच नियुक्त प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शिक्षकों को 21 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता बताई गई है। शिक्षकों का कहना है कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, उस समय टीईटी परीक्षा अनिवार्य नहीं थी। ऐसे में 20 से 25 वर्षों तक शासकीय सेवा देने के बाद अब टीईटी उत्तीर्ण करने की शर्त लागू करना उनके लिए उचित नहीं है। शिक्षकों ने कहा कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के अनुभव और वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता से निर्णय लेना चाहिए।
शिक्षक साझा मंच के जिलाध्यक्ष रामलाल साहू ने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को वरिष्ठता के आधार पर बिना टीईटी पदोन्नति का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था में अपनी सेवाएं दी हैं और उनकी सेवा अवधि को नजरअंदाज कर नई परीक्षा की अनिवार्यता लागू करना उचित नहीं है।
धरना प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कई अन्य मांगें भी शासन के सामने रखीं। इनमें पूर्व सेवा अवधि को जोड़कर पूर्ण पेंशन का लाभ देने, केंद्रीय वेतनमान के आधार पर वेतन निर्धारण करने, वेतन विसंगतियों को दूर करने, 13 फरवरी 2026 को जारी भर्ती-पदोन्नति नियमों को निरस्त करने तथा बीएड शिक्षकों के लिए विभागीय ब्रिज कोर्स की व्यवस्था करने की मांग शामिल रही।
शिक्षकों ने यह भी कहा कि आंदोलन के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए उन्होंने शनिवार को विद्यालयों में अपनी जिम्मेदारी निभाने के बाद धरना प्रदर्शन में हिस्सा लिया। शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से शासन तक पहुंचाना चाहते हैं और विद्यार्थियों की शिक्षा को प्रभावित करना उनका उद्देश्य नहीं है।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। शिक्षकों के अनुसार 29 अगस्त को जिलास्तरीय हड़ताल की जाएगी। इसके बाद 5 सितंबर शिक्षक दिवस तक शासन के निर्णय का इंतजार किया जाएगा। मांगों का समाधान नहीं होने की स्थिति में 9 सितंबर को मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के निवास का घेराव करने तथा इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
शिक्षकों ने शासन से मांग की है कि वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे शिक्षकों की परिस्थितियों और नियुक्ति के समय लागू नियमों को ध्यान में रखते हुए टीईटी की अनिवार्यता के संबंध में उचित निर्णय लिया जाए। साथ ही पदोन्नति, पेंशन, वेतन विसंगति और सेवा अवधि से जुड़ी समस्याओं का भी जल्द निराकरण किया जाए।