अंबिकापुर में स्वदेशी जागरण मंच के प्रांतीय विचार वर्ग का शुभारंभ, आत्मनिर्भर भारत पर जोर
अंबिकापुर में स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वावलंबी भारत अभियान के प्रांतीय विचार वर्ग और कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में स्वदेशी, आत्मनिर्भर भारत, स्थानीय उद्यमिता और आर्थिक सशक्तिकरण पर विस्तृत चर्चा की गई। विभिन्न क्षेत्रों के पदाधिकारियों और विशेषज्ञों ने स्वदेशी अर्थनीति को मजबूत करने पर जोर दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l सरगुजा जिले के अंबिकापुर में स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वावलंबी भारत अभियान के संयुक्त तत्वावधान में प्रांतीय विचार वर्ग एवं कार्यशाला का भव्य शुभारंभ किया गया। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के सभी संभागों से आए कार्यकर्ता, प्रांत स्तरीय पदाधिकारी, क्षेत्रीय प्रतिनिधि तथा विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वदेशी विचारधारा को मजबूत करना और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति देना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने तथा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। उद्घाटन सत्र में छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मस्व विभाग के मंत्री, प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं स्वदेशी चिंतक, विधायक सहित अनेक गणमान्य अतिथि मंचासीन रहे।
स्वागत उद्बोधन में आयोजन समिति के पदाधिकारी ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए स्वदेशी चिंतन, स्थानीय उत्पादन और उद्यमिता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने स्वावलंबी भारत अभियान के उद्देश्यों को विस्तार से बताते हुए कहा कि ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है।
क्षेत्रीय संयोजक ने स्वदेशी जागरण मंच की स्थापना, कार्यपद्धति और देशभर में चल रहे जनजागरण अभियानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक नीति नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से जुड़ा एक व्यापक आंदोलन है, जो राष्ट्र को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाता है।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल अभियान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्थानीय उद्योगों, कारीगरों और छोटे उद्यमों को बढ़ावा देकर ही भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थिति प्राप्त कर सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन में स्वदेशी उत्पादों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
मुख्य वक्ता ने वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा की और भारत की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत के पास विशाल युवा शक्ति, मजबूत बाजार और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। यदि देश स्थानीय उत्पादन, नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता को प्राथमिकता दे तो वह तेजी से विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने स्वदेशी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने, स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहित करने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
आगामी सत्रों में इस कार्यशाला के अंतर्गत स्वदेशी अर्थनीति, रोजगार सृजन, उद्यमिता विकास, कृषि, शिक्षा और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर गहन चर्चा और प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम का समापन “स्वदेशी अपनाएं – स्वावलंबी भारत बनाएं” के उद्घोष के साथ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। इस अवसर पर अनेक संगठन पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।