79 साल बाद भी अंधेरे में राजापड़ाव, बिजली की मांग को लेकर ग्रामीणों ने किया आंदोलन का ऐलान

गरियाबंद जिले के राजापड़ाव क्षेत्र की पांच ग्राम पंचायतों में अब तक बिजली नहीं पहुंचने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है। किसान संघर्ष समिति और जय अंबेडकरवादी युवा संगठन के नेतृत्व में ग्रामीण 17 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे और 10 जून को विशेष बैठक आयोजित करेंगे।

Jun 8, 2026 - 12:33
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79 साल बाद भी अंधेरे में राजापड़ाव, बिजली की मांग को लेकर ग्रामीणों ने किया आंदोलन का ऐलान

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l गरियाबंद जिले के राजापड़ाव क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। क्षेत्र के आदिवासी समुदाय और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि आजादी के लगभग आठ दशक बाद भी कई गांव बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। इसी मुद्दे को लेकर किसान संघर्ष समिति और जय अंबेडकरवादी युवा संगठन ने आंदोलन को तेज करने की घोषणा की है।

राजापड़ाव क्षेत्र उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में स्थित है, जहां आठ ग्राम पंचायतों के अंतर्गत 48 गांव, पारा और टोले आते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इनमें से पांच ग्राम पंचायतों के अनेक गांव आज भी बिजली सुविधा से वंचित हैं। उनका कहना है कि कुछ पंचायत मुख्यालयों तक सीमित रूप से बिजली पहुंची है, लेकिन दूरस्थ पारा-टोला अब भी अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों के अनुसार बिजली विस्तार के प्रयासों के दौरान वन क्षेत्र और विभिन्न अनुमतियों का हवाला देकर कार्य आगे नहीं बढ़ाया जाता। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

इसी मुद्दे को लेकर रविवार को ग्राम गोना में एक बड़ी बैठक आयोजित की गई, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने भाग लिया। बैठक में निर्णय लिया गया कि 8 जून को मैनपुर के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को 17 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा जाएगा। इन मांगों में बिजली, पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

बैठक में यह भी तय किया गया कि 10 जून को ग्राम अड़गडी में एक महा बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान ग्राम सभा के अधिकारों और स्थानीय स्वशासन से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। ग्रामीणों ने PESA कानून के तहत ग्राम सभाओं के अधिकारों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल बिजली का मुद्दा नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं और आदिवासी क्षेत्रों के विकास से जुड़ा व्यापक विषय है। उनका मानना है कि लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान के लिए प्रशासन और सरकार को गंभीर पहल करनी चाहिए।

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने विकास कार्यों को गति देने और क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने की मांग की। आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा।

राजापड़ाव क्षेत्र की यह पहल अब प्रशासन और सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की नजर बनी हुई है।