सपेरा बस्ती में बाल चौपाल, बच्चों ने सांप-सीढ़ी खेलकर सीखे बाल अधिकार और शिक्षा के महत्व
रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा स्थित सिनोधा की सपेरा बस्ती में आयोजित बाल चौपाल में बच्चों को सांप-सीढ़ी खेल के माध्यम से बाल अधिकार, शिक्षा और अच्छी आदतों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बाल विवाह, बाल श्रम और बच्चों के आवश्यक दस्तावेजों के मुद्दे भी प्रमुखता से उठे।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की अध्यक्षता में तिल्दा-नेवरा के सिनोधा स्थित सपेरा बस्ती में बाल चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना तथा समुदाय की जमीनी समस्याओं को समझना था। इस दौरान बच्चों को सांप-सीढ़ी के विशेष खेल के माध्यम से बाल अधिकारों और अच्छी आदतों का संदेश दिया गया।
बाल चौपाल के दौरान यह सामने आया कि घुमंतू जीवनशैली और मुख्यधारा से अलग निवास करने के कारण सपेरा बस्ती के अनेक बच्चे शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित हैं। अधिकांश बच्चों का जन्म अस्पताल में नहीं होने के कारण उनके जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, नियमित टीकाकरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज नहीं बन पाए हैं। इसके चलते बच्चों को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्थानीय नागरिकों से प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार होने के बाद बच्चों और उनके परिवारों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए समाज और प्रशासन दोनों की सहभागिता आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने भी इस दिशा में सहयोग का भरोसा दिलाया।
कार्यक्रम में सिनोधा के शासकीय मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने विद्यालय में कंप्यूटर शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी। साथ ही बाल श्रम, बाल विवाह और गुड टच-बैड टच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी। चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि सपेरा समुदाय के कुछ परिवारों में अब भी बाल विवाह की परंपरा प्रचलित है। इस पर संज्ञान लेते हुए डॉ. वर्णिका शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को बाल विवाह की रोकथाम, आवश्यक जांच और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कार्यक्रम में बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। बजरंगी मरावी ने हिप-हॉप नृत्य, जानवी यादव ने जस गीत प्रस्तुत किया, जबकि चार वर्षीय सुनीता ने अपनी कहानी से सभी का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण बाल अधिकारों पर आधारित सांप-सीढ़ी गतिविधि रही। इस खेल को सपेरा समुदाय की जीवनशैली से जोड़कर तैयार किया गया, जिससे बच्चों को सरल और रोचक तरीके से शिक्षा, अच्छे संस्कार, बाल संरक्षण और सही निर्णय के महत्व को समझाया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल चौपाल 2.0 अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। इसके माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर बच्चों की समस्याओं को समझा जाएगा और बाल अधिकारों के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के साथ बेहतर भविष्य मिल सके।