रायपुर नगर निगम जोन-4 की बैठक में हंगामा, जलभराव और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर विपक्ष ने उठाए सवाल

रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक-4 की बैठक में उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली, जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और वार्डों में जलभराव की समस्या को लेकर कड़े सवाल उठाए। बैठक के दौरान अधिकारियों पर गलत जानकारी देने का आरोप भी लगाया गया।

Jul 28, 2026 - 15:49
Jul 28, 2026 - 15:51
 0  5
रायपुर नगर निगम जोन-4 की बैठक में हंगामा, जलभराव और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर विपक्ष ने उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l राजधानी रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक-4 की बैठक सोमवार को हंगामेदार रही। बैठक के दौरान विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और विकास कार्यों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।

बैठक के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दा वार्डों में जलभराव की समस्या रहा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद कई क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था प्रभावी नहीं हो सकी है। बारिश के दौरान अनेक वार्डों में पानी भरने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जलभराव रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और जिन क्षेत्रों में समस्या लगातार बनी हुई है, वहां समाधान की क्या कार्ययोजना है।

बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि जोन अध्यक्ष और जोन कमिश्नर के बीच आवश्यक समन्वय का अभाव दिखाई दे रहा है। विपक्ष की ओर से कहा गया कि यदि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल नहीं होगा तो विकास कार्य प्रभावित होंगे और आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

आकाश तिवारी ने आरोप लगाया कि कई बार जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि वार्ड स्तर पर मिलने वाली समस्याओं को प्राथमिकता से हल किया जाना चाहिए, लेकिन अधिकारियों का रवैया संतोषजनक नहीं दिखाई देता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बैठक में कुछ मामलों में गलत और भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की गई, जिससे जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ी।

बैठक के दौरान विपक्षी पार्षदों ने अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि यदि विकास कार्यों और जनसुविधाओं से जुड़े मामलों में सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाएगी तो समस्याओं का समाधान संभव नहीं होगा। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से पारदर्शिता के साथ कार्य करने और सभी वार्डों की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने की मांग की।

जलभराव की समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों ने विशेष रूप से नालियों की नियमित सफाई, जल निकासी तंत्र को मजबूत करने और संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि हर वर्ष बारिश के मौसम में एक जैसी समस्याएं सामने आती हैं, इसलिए केवल अस्थायी उपायों के बजाय दीर्घकालिक योजना तैयार की जानी चाहिए।

बैठक में मौजूद अधिकारियों ने विभिन्न मुद्दों पर अपना पक्ष भी रखा और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, विपक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम दिखाई देने चाहिए। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है और इसके लिए प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

बैठक में हुए हंगामे के बाद यह स्पष्ट हो गया कि नगर निगम के भीतर विकास कार्यों, जलभराव और प्रशासनिक समन्वय जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। अब देखना होगा कि बैठक में उठाए गए सवालों पर नगर निगम प्रशासन किस प्रकार कार्रवाई करता है और आम नागरिकों को राहत दिलाने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।