मोवा गारमेंट फैक्ट्री के पुनर्जीवन की तैयारी, पीपीपी मॉडल पर 30 वर्ष की लीज से मिलेगा रोजगार को बढ़ावा
रायपुर नगर निगम ने मोवा स्थित बंद पड़ी गारमेंट फैक्ट्री के पुनर्जीवन और संचालन के लिए पीपीपी मॉडल पर 30 वर्ष की लीज के तहत आरएफपी तैयार किया है। इस परियोजना से महिलाओं और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा वस्त्र उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राजधानी रायपुर में बंद पड़ी मोवा (विधानसभा रोड) स्थित गारमेंट फैक्ट्री को दोबारा संचालित करने की दिशा में नगर निगम ने महत्वपूर्ण पहल की है। नगर पालिक निगम रायपुर ने फैक्ट्री के पुनर्जीवन, आधुनिकीकरण और संचालन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार कर लिया है। इस परियोजना के माध्यम से वर्षों से निष्क्रिय पड़ी परिसंपत्ति को फिर से उपयोग में लाने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना के तहत चयनित संस्था को 30 वर्ष की लीज पर गारमेंट फैक्ट्री परिसर उपलब्ध कराया जाएगा। चयनित एजेंसी अपने संसाधनों से फैक्ट्री में आवश्यक मशीनरी स्थापित करेगी, आधुनिक तकनीकों के अनुरूप उसका उन्नयन करेगी तथा संचालन और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी निभाएगी। इससे लंबे समय से बंद पड़ी फैक्ट्री का पुनः संचालन संभव हो सकेगा।
इस योजना को गति देने के लिए महापौर मीनल चौबे ने नगर निगम के योजना विभाग के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में परियोजना की रूपरेखा, संचालन व्यवस्था और क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। महापौर ने परियोजना को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने और सभी आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करने पर जोर दिया।
नगर निगम के अनुसार इस परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है। विशेष रूप से महिलाओं को गारमेंट उद्योग में रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण, कौशल विकास और स्वरोजगार से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा। इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा बल्कि स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
परियोजना के क्रियान्वयन में उद्योग विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा। राज्य शासन की औद्योगिक नीतियों के अनुरूप वस्त्र एवं रेडीमेड गारमेंट उद्योग को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आधुनिक मशीनों और उत्पादन सुविधाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की भी संभावना है।
नगर निगम का मानना है कि इस परियोजना से लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी सरकारी परिसंपत्ति का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा। साथ ही नगर निगम को राजस्व प्राप्त होगा, जिससे भविष्य में नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों पर अधिक निवेश किया जा सकेगा।
नगर निगम ने बताया कि परियोजना को लागू करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं प्रारंभ कर दी गई हैं। आरएफपी प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित संस्था के माध्यम से फैक्ट्री का संचालन शुरू किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि इस पहल से रायपुर में वस्त्र उद्योग को नई पहचान मिलेगी, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और बड़ी संख्या में महिलाओं तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।