इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (मनेन्द्रगढ़ संभाग) के कार्यपालन अभियंता द्वारा आधिकारिक खंडन जारी किया गया है। विभाग का कहना है कि हाल में प्रकाशित खबरें भ्रामक हैं और निर्माण कार्यों में पाई गई मामूली खामियों को तत्काल सुधार लिया गया है।
विभागीय स्पष्टीकरण के अनुसार पैकेज CG-11-93 के अंतर्गत सादन टोला से लावाहोरी थोरगी मार्ग पर केवल लगभग 10 मीटर हिस्से में क्षति पाई गई थी। संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी कर तत्काल मरम्मत कराई गई है। इसी तरह घाघरा-लालमाटी मार्ग को विभाग ने पूर्णतः संतोषजनक बताया है। वहीं पैकेज CG-11-83 के अंतर्गत नौढ़िया से डुगालाडीह मार्ग पर भी मामूली सुधार कराए जाने का दावा किया गया है।
विभाग का कहना है कि सभी सड़क निर्माण कार्य भारत सरकार और राज्य शासन द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप कराए गए हैं और निर्माण की सतत निगरानी की गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जहां भी प्रारंभिक स्तर पर कोई तकनीकी कमी सामने आई, वहां त्वरित सुधार कराया गया है।
हालांकि विभागीय सफाई के बावजूद ग्रामीणों का असंतोष कम नहीं हुआ है। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यदि सड़कें वास्तव में तय मानकों के अनुसार बनी होतीं, तो उद्घाटन के कुछ ही समय बाद डामर की परतें उखड़ना शुरू नहीं होता। उनका कहना है कि सड़कों की वास्तविक तकनीकी खामी को दूर करने के बजाय केवल ऊपर से पतली परत डालकर पैचवर्क किया जा रहा है, ताकि शिकायतों को दबाया जा सके।
ग्रामीणों ने निर्माण के दौरान निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि क्या निर्माण कार्य के दौरान किसी स्वतंत्र एजेंसी से थर्ड पार्टी ऑडिट या लैब टेस्टिंग कराई गई थी, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि पहली ही बारिश या सामान्य आवागमन में सड़क की परतें उखड़ने लगना इस बात का संकेत है कि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पीएम जनमन जैसी योजना का उद्देश्य दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों को वर्षों तक टिकाऊ सड़क सुविधा देना है, ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच आसान हो सके। लेकिन भरतपुर क्षेत्र में बनी सड़कों की हालत देखकर योजना के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदारों व अधिकारियों पर कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो और सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।