पीजी कॉलेज कवर्धा में औषधीय एवं पूजनीय पौधों की प्रदर्शनी, विद्यार्थियों को बताए सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व
आचार्य पंथ श्री गृंधमुनि नाम साहेब शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कवर्धा में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रादेशिक देशज संसाधन एवं संस्कृति प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय सेवा योजना और हैप्पीनेस सेल के संयुक्त तत्वावधान में औषधीय एवं पूजनीय पौधों की प्रदर्शनी आयोजित की गई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को विभिन्न पौधों के सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और वैज्ञानिक महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही प्रकृति संरक्षण और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा स्थित आचार्य पंथ श्री गृंधमुनि नाम साहेब शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में औषधीय एवं पूजनीय पौधों की प्रदर्शनी और जानकारी प्रदान करने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रादेशिक देशज संसाधन एवं संस्कृति प्रकोष्ठ, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) एवं हैप्पीनेस सेल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ औषधीय एवं पूजनीय पौधों के सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व से परिचित कराना था।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने के साथ मानसिक स्वास्थ्य के उन्नयन को लेकर भी जानकारी दी गई। प्रदर्शनी में विभिन्न औषधीय एवं पूजनीय पौधों को प्रदर्शित किया गया और उनके उपयोग, सांस्कृतिक महत्व तथा वैज्ञानिक विशेषताओं के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. ऋचा मिश्रा ने की। उन्होंने कहा कि हमारे आसपास सहज रूप से उपलब्ध अनेक पौधों और वनस्पतियों का सांस्कृतिक, पर्यावरणीय एवं वैज्ञानिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इन पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जागरूक होना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में प्राध्यापक डॉ. अनिल शर्मा ने बेलपत्र, धतूरा और आक सहित विभिन्न पौधों के सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में कई पौधों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रहा है, वहीं इनके वैज्ञानिक पक्ष को समझना भी आवश्यक है।
इसी क्रम में नरेंद्र कुमार कुलमित्र ने तुलसी, नीम, पीपल, बरगद और मेहंदी सहित विभिन्न पौधों के सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वनस्पतियों की उपयोगिता और उनके संरक्षण के महत्व से अवगत कराया।
कार्यक्रम का संयोजन समिति प्रभारी डॉ. कविता कन्नौजे ने किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ द्वारा प्रकृति और पर्यावरण के साथ संतुलन बनाए रखने तथा मानसिक स्वास्थ्य के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से समय-समय पर जागरूकता और रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौधे भारतीय ज्ञान परंपरा और प्रकृति के साथ मानव के गहरे संबंध के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।
इस अवसर पर शैक्षणिक स्टाफ संतोष साहू, डॉ. राकेश चंदेल, भानुप्रताप सिंह, कृष्णा बंजारे और डॉ. जय मेहरा सहित महाविद्यालय का स्टाफ, एनएसएस वालंटियर्स, एनसीसी कैडेट्स तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पौधों के बारे में जानकारी प्राप्त की।