तीन साल से अधूरा स्कूल भवन, एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर पहली से पांचवीं तक के छात्र

पखांजुर क्षेत्र के ग्राम निडदे स्थित प्राथमिक शाला का अतिरिक्त भवन पिछले तीन से चार वर्षों से अधूरा पड़ा है। निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण पहली से पांचवीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों को एक ही कक्ष में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने जल्द भवन निर्माण पूरा कर बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।

Jul 8, 2026 - 12:30
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तीन साल से अधूरा स्कूल भवन, एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर पहली से पांचवीं तक के छात्र

UNITED NEWS OF ASIA. रोहित देहारी, पखांजुर l पखांजुर क्षेत्र के ग्राम निडदे स्थित प्राथमिक शाला में शिक्षा व्यवस्था भवन की कमी के कारण गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। विद्यालय का अतिरिक्त भवन पिछले तीन से चार वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण पहली से पांचवीं कक्षा तक के सभी विद्यार्थियों को एक ही कमरे में बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे न केवल शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और एकाग्रता पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अतिरिक्त भवन का निर्माण कई वर्ष पहले शुरू किया गया था, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही और निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी के कारण आज तक भवन पूरा नहीं हो सका। अधूरा निर्माण होने से विद्यालय को अतिरिक्त कक्ष नहीं मिल पाए हैं, जिसके चलते सभी कक्षाओं का संचालन एक ही कमरे में किया जा रहा है।

विद्यालय में पहली से पांचवीं तक के बच्चों के एक साथ बैठने से शिक्षकों को भी पढ़ाने में कठिनाई होती है। अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम अलग होने के कारण एक ही समय में प्रभावी शिक्षण संभव नहीं हो पाता। इससे बच्चों की सीखने की क्षमता प्रभावित हो रही है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उद्देश्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों और विभाग का ध्यान इस समस्या की ओर दिलाया गया, लेकिन अब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया। उनका कहना है कि शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए, लेकिन अधूरे भवन के कारण विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि स्कूल भवन का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा कराया जाए, ताकि बच्चों को अलग-अलग कक्षाओं में बैठकर पढ़ने की सुविधा मिल सके। उनका कहना है कि यदि समय रहते निर्माण पूरा नहीं हुआ तो आने वाले शैक्षणिक सत्रों में भी विद्यार्थियों को इसी समस्या का सामना करना पड़ेगा।

स्थानीय लोगों का मानना है कि शिक्षा किसी भी समाज की नींव होती है और बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के लिए विद्यालयों में पर्याप्त आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होना आवश्यक है। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग और संबंधित निर्माण एजेंसी पर टिकी हैं कि वे इस लंबे समय से लंबित कार्य को कब पूरा करते हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र कार्रवाई करेगा, ताकि नौनिहालों को सुरक्षित, व्यवस्थित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।