राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 60 बच्चों के हृदय रोग का निःशुल्क उपचार, जन्मजात बीमारियों का भी सफल इलाज

कबीरधाम जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत पिछले तीन वर्षों में 60 बच्चों के हृदय रोग का सफल उपचार कराया गया है। इसके अलावा 21 बच्चों के कटे-फटे होंठ एवं तालु, 5 बच्चों के क्लब फुट और 4 बच्चों की नवजात बधिरता का निःशुल्क उपचार किया गया है। स्वास्थ्य विभाग बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग कर गंभीर और जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान एवं उपचार सुनिश्चित कर रहा है।

Sep 11, 2026 - 19:12
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 60 बच्चों के हृदय रोग का निःशुल्क उपचार, जन्मजात बीमारियों का भी सफल इलाज

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l 11 सितंबर 2026। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के अंतर्गत कबीरधाम जिले में बच्चों की विभिन्न जन्मजात और गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार स्क्रीनिंग और उपचार की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। इसी क्रम में आरबीएसके श्रेणी-ए के अंतर्गत पिछले तीन वर्षों में जिले के 60 बच्चों का हृदय रोग का सफल उपचार कराया गया है। इसके साथ ही 21 बच्चों के कटे-फटे होंठ एवं तालु यानी क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट का ऑपरेशन, 5 बच्चों के टेढ़े-मेढ़े पैर यानी क्लब फुट तथा 4 बच्चों की नवजात बधिरता से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का भी सफल उपचार कराया जा चुका है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले के सभी शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के साथ अनुदान प्राप्त विद्यालयों, आवासीय विद्यालयों, आश्रम एवं छात्रावासों में अध्ययनरत बच्चों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों की भी चिरायु दल द्वारा नियमित जांच की जाती है। इस दल में चिकित्सक, फार्मासिस्ट, लैब टेक्निशियन और एएनएम शामिल होते हैं, जो बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की जांच के साथ आवश्यक परामर्श और उपचार संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

चिरायु दल द्वारा वर्ष में एक बार सभी विद्यालयों और वर्ष में दो बार सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण कर बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाती है। जांच के दौरान यदि किसी बच्चे में गंभीर बीमारी या जन्मजात विकृति के लक्षण सामने आते हैं, तो उसे आगे की जांच और उपचार के लिए चिरायु वाहन के माध्यम से शासन द्वारा अनुबंधित शासकीय और निजी अस्पतालों में भेजा जाता है। आवश्यकता के अनुसार पात्र बच्चों का उपचार छत्तीसगढ़ शासन से अनुबंधित राज्य के बाहर स्थित अस्पतालों में भी निःशुल्क कराया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में मदद मिल रही है।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सलिल मिश्रा ने बताया कि छोटे बच्चों में हृदय रोग के कुछ प्रमुख संकेतों को अभिभावकों को गंभीरता से लेना चाहिए। दूध पीने में परेशानी, स्तनपान या फीडिंग के दौरान जल्दी थक जाना या हांफने लगना, दूध पीते या रोते समय अधिक पसीना आना और होंठ, जीभ या नाखूनों का नीला अथवा बैंगनी पड़ना ऐसे संकेत हो सकते हैं, जिन पर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। इसके अलावा पर्याप्त भोजन के बावजूद बच्चे के वजन और शारीरिक विकास में अपेक्षित वृद्धि न होना तथा आराम या नींद के दौरान भी तेज सांस चलना भी स्वास्थ्य संबंधी चिंता का संकेत हो सकता है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों में इस तरह के लक्षण दिखाई देने पर उन्हें नजरअंदाज न करें और तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें। समय पर स्वास्थ्य जांच और बीमारी की शीघ्र पहचान होने से बच्चों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य जिले के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है।

चिरायु कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में बीमारी की पहचान से लेकर उपचार तक की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जा रहा है। नियमित स्क्रीनिंग के जरिए जन्मजात विकृतियों और गंभीर बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान कर पात्र बच्चों को उपचार के लिए उचित स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे बच्चों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने के साथ उनके स्वस्थ विकास और बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण मदद मिल रही है।