कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को नशे के विभिन्न प्रकारों, जैसे तंबाकू, शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसके परिवार, मित्रों और पूरे समाज पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।
विद्यार्थियों को समझाया गया कि नशे की लत से पढ़ाई में गिरावट, व्यवहार में बदलाव, पारिवारिक तनाव और भविष्य की संभावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ता है। साथ ही यह भी बताया गया कि सही संगति, सकारात्मक सोच, खेल-कूद एवं रचनात्मक गतिविधियों में भागीदारी से नशे से दूर रहा जा सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी विद्यार्थियों को नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। उन्हें यह संकल्प दिलाया गया कि वे स्वयं जीवनभर नशे से दूर रहेंगे और अपने परिवार, मित्रों तथा आसपास के लोगों को भी नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेंगे। इस कार्यक्रम से कुल 55 छात्र-छात्राएं लाभान्वित हुए।
यह जागरूकता कार्यक्रम समाज कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय उपसंचालक अभिलाषा पांडा के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यक्रम में नशा मुक्त भारत अभियान की वालेंटियर ज्योति साहू ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए नशे से बचने के व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या या तनाव की स्थिति में नशे की ओर जाने के बजाय शिक्षकों, माता-पिता या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बातचीत करनी चाहिए।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकगण भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। शिक्षकों ने कहा कि यदि बच्चे प्रारंभिक स्तर से ही नशे के खतरों को समझ लें, तो भविष्य में एक सशक्त और जिम्मेदार नागरिक के रूप में उनका विकास संभव है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता विकसित करना, उन्हें सही दिशा दिखाना तथा एक स्वस्थ, सुरक्षित और जागरूक समाज की नींव मजबूत करना रहा। विद्यालय स्तर पर आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी को नशे से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।