कबीरधाम जिले में धान उपार्जन 2025-26 की शुरुआत, पहले दिन 306.8 क्विंटल खरीदी

कबीरधाम जिले में धान उपार्जन वर्ष 2025-26 का शुभारंभ पूजा-अर्चना के साथ हुआ। पहले दिन 306.8 क्विंटल धान खरीदा गया। सहकारी समितियों की हड़ताल को देखते हुए कलेक्टर ने वैकल्पिक व्यवस्था में अधिकारियों को समिति प्रबंधक का प्रभार सौंपा। तीन समिति प्रबंधक लापरवाही पर बर्खास्त किए गए व सरकार ने एस्मा लागू कर दिया।

Nov 16, 2025 - 15:04
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कबीरधाम जिले में धान उपार्जन 2025-26 की शुरुआत, पहले दिन 306.8 क्विंटल खरीदी

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। कबीरधाम जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान उपार्जन कार्य का शुभारंभ शनिवार को विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया गया। पहले दिन जिले में कुल 306.8 क्विंटल धान की खरीदी संपन्न हुई। जिला प्रशासन ने सभी धान खरीदी केंद्रों में नाप-तौल की सटीक व्यवस्था, कांटा–बांट, पर्याप्त बारदाना, ड्रेनेज सिस्टम व अन्य आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित की हैं ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उपार्जन कार्य प्रभावित न हो, इसे ध्यान में रखते हुए कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अन्य विभागों के अधिकारियों को समिति प्रबंधक का प्रभार सौंपा, जिससे धान खरीदी की प्रक्रिया सुचारू, पारदर्शी और समयबद्ध रूप से जारी रह सके। इस निर्णय का लाभ किसानों को सीधे मिला है और जिले में धान उपार्जन व्यवस्था पूरी तरह से सामान्य रूप से संचालित हो रही है।

कलेक्टर श्री वर्मा ने जानकारी दी कि जिले की सभी 108 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों व उपार्जन केंद्रों में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, पटवारी, उप अभियंता, करारोपण अधिकारी, बीपीएम, मत्स्य निरीक्षक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों को प्रभार सौंपा गया है, ताकि खरीदी व्यवस्था में किसी प्रकार की बाधा न आए।

इस बीच तीन समिति प्रबंधकों—घनश्याम चन्द्रवंशी (जिंदा), गंगादास मानिकपुरी (सहसपुर लोहारा) और मनोज चन्द्राकर (चिल्फी)—को अपने कर्तव्यों में लापरवाही एवं अनुपस्थित रहने पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जारी आदेश में उल्लेख है कि संबंधित कर्मचारियों को पूर्व में कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था, परंतु निर्धारित तिथि तक वे अनुपस्थित रहे। कारण बताओ नोटिस का जवाब भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इनके लापरवाह व्यवहार से धान उपार्जन, ऋण वितरण, खाद व बीज वितरण जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियाँ प्रभावित हुईं, जिससे किसानों को असुविधा हुई। इसे गंभीर कदाचार मानते हुए सेवा नियमों की कंडिका 16 के तहत तत्काल प्रभाव से उनकी सेवाएँ समाप्त की गईं।

इधर, सहकारी कर्मचारियों की चल रही हड़ताल पर छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए एस्मा लागू कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी जैसे महत्वपूर्ण कार्य को बाधित करना सीधे किसानों के हित पर चोट पहुंचाता है, इसलिए हड़ताल को अवैध घोषित कर सभी कर्मचारियों को तुरंत कार्य पर लौटने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कर्मचारी निर्धारित समय सीमा तक ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ विधिसम्मत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

यह व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था धान खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।