UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा/पाली। जिले के पाली जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मुनगाडीह में कथित भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और पंचों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग कागजों में विकास कार्य दिखाकर किया गया, जबकि वास्तविकता में इन कार्यों का कोई अस्तित्व नहीं मिला।
मामले के अनुसार, पंचायत में शौचालय मरम्मत, अतिरिक्त कक्ष निर्माण और विद्यालयों के जीर्णोद्वार जैसे कार्यों के नाम पर लाखों रुपये आहरित किए गए। दस्तावेजों में मिडिल स्कूल मुनगाडीह में शौचालय मरम्मत के लिए 17 अक्टूबर 2025 को 36,650 रुपये तथा मजदूरी मद में 5,350 रुपये खर्च दर्शाया गया है। इसी तरह 29 नवंबर 2025 को प्राथमिक शाला में अतिरिक्त कक्ष के जीर्णोद्वार के लिए 68,000 रुपये और चारपारा स्थित प्राथमिक शाला में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के नाम पर 17,000 रुपये निकाले गए।
जियोटैग रिपोर्ट के अनुसार कुल 1 लाख 27 हजार रुपये की राशि इन कार्यों के लिए खर्च दिखाई गई है। लेकिन जब ग्रामीणों ने मौके पर जाकर जांच की, तो स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत मिली। मुनगाडीह मिडिल स्कूल परिसर में पहले से बने दो शौचालय जर्जर अवस्था में पाए गए, जिनमें किसी प्रकार की मरम्मत के संकेत नहीं दिखे। वहीं पंचायत के अंतर्गत संचालित तीनों प्राथमिक शालाओं में कहीं भी अतिरिक्त कक्ष का निर्माण नहीं मिला। चारपारा स्कूल में भी निर्माण कार्य का कोई चिन्ह तक नहीं देखा गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा मामला सरपंच प्रमिला कोराम और पूर्व में पदस्थ सचिव नेहा आनंद की मिलीभगत से अंजाम दिया गया है। बताया जा रहा है कि सचिव का हाल ही में अन्य पंचायत में स्थानांतरण हुआ है, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान ही यह अनियमितताएं हुई हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई मामलों में पंचों को बिना जानकारी दिए ही राशि निकाली गई, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
पेयजल व्यवस्था के नाम पर भी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पहले से स्थापित सबमर्सिबल पंप और सिन्टेक्स टैंकों को नए कार्य के रूप में दिखाकर राशि आहरित की गई। वहीं पाइपलाइन विस्तार कार्य में भी लागत से अधिक राशि निकालकर बंदरबांट किए जाने की बात सामने आई है।
इस पूरे मामले ने पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और आम जनता का विश्वास शासन-प्रशासन से उठ जाएगा।
ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी राशि की वसूली की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े अन्य मामलों के भी सामने आने की संभावना जताई जा रही है।