सिंडिकेट के 'काला कानून' में MCB; कोयला, लकड़ी और रेत की खुली लूट, सिस्टम मौन!

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला में अवैध कोयला खनन, लकड़ी कटाई और रेत तस्करी का बड़ा सिंडिकेट सक्रिय होने के आरोप सामने आए हैं। हसदेव वन क्षेत्र के कई इलाकों में रोजाना सैकड़ों टन कोयला और कीमती लकड़ी की अवैध निकासी की चर्चा है, जबकि स्थानीय लोगों ने प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

Mar 12, 2026 - 19:26
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सिंडिकेट के 'काला कानून' में MCB; कोयला, लकड़ी और रेत की खुली लूट, सिस्टम मौन!

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, मनेन्द्रगढ़ | MCB जिले में प्रकृति की बेशकीमती संपदा पर तस्करों का 'डेथ वारंट' जारी है। जिले के वन परिक्षेत्रों में इन दिनों कानून का राज नहीं, बल्कि तस्करों के एक विशाल सिंडिकेट का सिक्का चल रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि यह पूरा खेल जिला प्रशासन और वन विभाग की नाक के नीचे चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल 'कागजी घोड़े' दौड़ाए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बिहारपुर से लेकर हसदेव के जंगलों तक, तस्करों की छोटी-छोटी कड़ियाँ जुड़कर एक अभेद्य सिंडिकेट बना चुकी हैं, जिसे तोड़ पाने में शासन-प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।हसदेव बेल्ट बना तस्करों का 'सेफ कॉरिडोर'​हसदेव क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अमृतधारा, नागपुर, उजियारपुर, तर्रा बसेर और राधा रमन नगर जैसे इलाके अब तस्करी के नए 'हब' बन चुके हैं। यहाँ से रोजाना सैकड़ों टन कोयला और कीमती लकड़ियाँ अवैध रूप से निकाली जा रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों को चंद रुपयों का लालच देकर इस काले धंधे में उतारा गया है, जबकि असली मुनाफा 'ऊपर' बैठे आका डकार रहे हैं।

बिहारपुर से नागपुर तक फैला जाल, कोयले की कालिख में डूबा सिस्टम 'काले सोने' की खुली लूट

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार जिले में इन दिनों प्रकृति की छाती चीरकर अवैध कोयला खनन का खेल चरम पर है। सूत्रों के अनुसार, जिले के वन क्षेत्रों से प्रतिदिन सैकड़ों टन कोयला अवैध रूप से निकाला जा रहा है। यह महज चोरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित व्यापार बन चुका है। हसदेव क्षेत्र के उजियारपुर, तर्रा बसेर और राधा रमन नगर ऐसे इलाके हैं जहाँ धरती का सीना छलनी कर 'काला सोना' निकाला जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि ऊंचे रसूखदारों के इशारे पर यह पूरा काला कारोबार 'सिंडिकेट' के जरिए संचालित हो रहा है, जिसमें छोटी-छोटी कड़ियाँ जुड़कर एक अभेद्य दीवार की तरह काम कर रही हैं।

​ईंट भट्टों में खपत का खेल

​इस अवैध कोयले का सबसे बड़ा ठिकाना क्षेत्र में संचालित अवैध ईंट भट्टे बने हुए हैं। जंगलों से चोरी किया गया कोयला सीधे इन भट्टों में सप्लाई किया जा रहा है। नियम-कायदों को ताक पर रखकर चल रहे ये भट्टे बिना किसी वैध रॉयल्टी या कागजात के इस चोरी के कोयले को ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि सिंडिकेट ने सप्लाई चेन इतनी मजबूत कर ली है कि वन विभाग की गश्ती टीम के पहुंचने से पहले ही माल ठिकाने लगा दिया जाता है। स्थानीय ग्रामीणों को इस जोखिम भरे काम में मोहरा बनाया जा रहा है, जबकि मलाई सिंडिकेट के आका खा रहे हैं।

वन विभाग की 'नाकामी' या 'नरमी'?

​वन मंडल मनेंद्रगढ़ का बिहारपुर परिक्षेत्र वर्षों से इन गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। चाहे वह अवैध कोयला उत्खनन हो, बेशकीमती लकड़ी की कटाई हो या फिर रेत की चोरी—प्रशासन और वन विभाग इन्हें रोक पाने में पूरी तरह पंगु साबित हुए हैं। अमृतधारा और नागपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से दिन-दहाड़े जंगलों को खोखला कर रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर केवल छोटी-मोटी जब्ती दिखाकर 'खानापूर्ति' की जा रही है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

​'टेबल के नीचे' का भ्रष्टाचार

​विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि इस महा-लूट की पटकथा ऊपर से लेकर नीचे तक के अधिकारियों और कुछ सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों ने मिलकर लिखी है। चर्चा है कि इस सिंडिकेट को 'टेबल के नीचे' से पूर्ण स्वीकृति प्रदान की गई है। यही वजह है कि बड़ी शिकायतों के बावजूद जांच की फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। रसूखदारों के दबाव में ईमानदार कर्मचारी भी चुप रहने को मजबूर हैं। जिले की जनता अब प्रशासन की 'दिखावटी' कार्यवाहियों पर भरोसा खो चुकी है और एक बड़े हस्तक्षेप की मांग कर रही है।