'प्रॉक्सी कल्चर' की विदाई या नए 'नवाब' की ताजपोशी? पोस्टर बाजी में उड़ाया जा रहा जनता के मुद्दों का मखौल!

मनेंद्रगढ़ में विधायक प्रतिनिधि की नियुक्ति के बाद शुरू हुई पोस्टरबाजी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ‘प्रॉक्सी कल्चर’ की समाप्ति के दावों के बीच लाखों के होर्डिंग्स और शक्ति प्रदर्शन पर जनता सवाल उठा रही है।

Feb 24, 2026 - 20:07
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'प्रॉक्सी कल्चर' की विदाई या नए 'नवाब' की ताजपोशी? पोस्टर बाजी में उड़ाया जा रहा जनता के मुद्दों का मखौल!

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, मनेंद्रगढ़ (MCB)। कहते हैं "चेहरे बदलते हैं, लेकिन चाल नहीं।" मनेंद्रगढ़ की राजनीति में इन दिनों यही कहावत चरितार्थ हो रही है। 'पति-राज' और प्रशासनिक दखलअंदाजी के जिस कैंसर को खत्म करने के लिए शासन ने 'सर्जिकल स्ट्राइक' करते हुए पुराने विधायक प्रतिनिधि को दूध में से मक्खी की तरह बाहर फेंका था, नए प्रतिनिधि की 'एंट्री' ने उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

लाखों के पोस्टर, कौड़ी भर का विकास!

सवाल यह है कि जो विधायक प्रतिनिधि महज एक 'संदेशवाहक' या विधायक की अनुपस्थिति में 'सुझाव' देने वाला होता है, उसका रसूख किसी कैबिनेट मंत्री या मुख्यमंत्री से बड़ा कैसे हो गया? पूरे शहर को लाखों रुपयों के पोस्टरों से पाट दिया गया है। ये पैसे किसके हैं? क्या ये वही धन है जिसे नगर के विकास, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों और बदहाल सड़कों पर खर्च होना चाहिए था?

सत्ता का नशा या जनसेवा का जज्बा?

नगर की जनता अब इस 'प्रॉक्सी कल्चर' के नए संस्करण से ऊब चुकी है। राजनीतिक दलों को समझना होगा कि जनता को 'होर्डिंग्स' वाले नेता नहीं, बल्कि 'होल्डिंग्स' (पकड़) रखने वाले ऐसे प्रतिनिधि चाहिए जो प्रशासन की आंखों में आंखें डालकर जनसमस्याओं का समाधान करा सकें।शासन ने 'प्रॉक्सी कल्चर' पर प्रहार किया था, लेकिन यहाँ तो नया 'पोस्टर कल्चर' हावी हो गया है। देखना यह है कि क्या कलेक्टर और जिला प्रशासन इस फिजूलखर्ची और शक्ति-प्रदर्शन पर भी वैसे ही नकेल कसेंगे जैसे पुराने प्रतिनिधि पर कसी गई थी, या फिर 'वही ढाक के तीन पात' वाली स्थिति बनी रहेगी।